एफएनएन , देहरादून : उत्तराखंड के सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ तीर्थयात्रा कॉरिडोर में कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तराखंड सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मामले में सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की व्यवस्था, शौचालयों के बुनियादी ढांचे और ठोस कचरे के प्रबंधन में कथित खामियों का मुद्दा उठाया गया है।
NGT की मुख्य पीठ ने इस मामले को पर्यावरणीय मानकों के पालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पर्यावरणीय खामियों का आरोप
NGT के 6 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, नोएडा के पर्यावरण एवं सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने आवेदन दाखिल कर सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ क्षेत्र में पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित क्षेत्र में कुछ नालों का उचित उपयोग नहीं हो रहा है। इसके अलावा, सीवर कनेक्टिविटी की कमी, शौचालयों के अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और ठोस कचरे के अनुचित प्रबंधन की समस्या भी बताई गई है। आवेदन में कथित तौर पर अपर्याप्त तरीके से ट्रीट किए गए गंदे पानी के बहाव का मुद्दा भी उठाया गया है।
ये सभी आरोप आवेदक की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। इन पर संबंधित विभागों और पक्षों का जवाब आना बाकी है।
केदारनाथ में 600 KLD का STP पर्याप्त नहीं होने का दावा
आवेदन में केदारनाथ स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदक का दावा है कि यहां स्थापित 600 किलोलीटर प्रतिदिन (KLD) क्षमता वाला STP क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले सीवेज के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं है।
अमित गुप्ता ने आवेदन में कहा है कि केदारनाथ में कम से कम 1,000 KLD क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की जरूरत है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था से क्षेत्र में निकलने वाले सीवेज का समुचित उपचार सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।
हालांकि, STP की वास्तविक जरूरत और मौजूदा क्षमता की पर्याप्तता का आकलन संबंधित विभागों के जवाब तथा उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के आधार पर किया जाना होगा।
गौरीकुंड की 200 KLD क्षमता पर भी सवाल
आवेदन में गौरीकुंड की सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। आवेदक के मुताबिक, यहां 200 KLD क्षमता वाली ट्रीटमेंट सुविधा मौजूद है, लेकिन क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले सीवेज की मात्रा को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है।
इसके अलावा, आवेदन में सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ धाम से निकलने वाले सीवेज तथा ठोस कचरे के उपचार और निस्तारण के लिए उचित सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठाए गए हैं।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर ठोस कचरा बिखरा रहता है और उसके प्रबंधन की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
NGT ने संबंधित पक्षों को जारी किया नोटिस
NGT की मुख्य पीठ की अध्यक्षता चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने की। पीठ में एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद भी शामिल थे।
6 अक्टूबर के आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि आवेदन पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है। इसी आधार पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
आदेश के मुताबिक, आवेदक को अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले संबंधित पक्षों को आवेदन की प्रति उपलब्ध कराने और इसकी पुष्टि करने वाला हलफनामा दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
17 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। अब संबंधित पक्षों के जवाब के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि यात्रा कॉरिडोर में सीवेज ट्रीटमेंट, ठोस कचरे के निस्तारण और अन्य पर्यावरणीय व्यवस्थाओं को लेकर उठाए गए आरोपों पर क्या स्थिति सामने आती है।
केदारनाथ जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण प्रबंधन और स्वच्छता की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। NGT की कार्यवाही के दौरान अब इन व्यवस्थाओं की पर्याप्तता और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़े सवालों पर ध्यान रहेगा।








