एफएनएन, नई दिल्ली : Modi Government ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया आदेश जारी करते हुए इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों से थोक मात्रा में ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगा।
सरकार के अनुसार, हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह रिटेल और बल्क कीमतों के बीच बड़ा अंतर बताया गया है। इसी कारण कई बड़े उपभोक्ता बल्क डिपो की बजाय पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे थे, जिससे आम ग्राहकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।
11 जून 2026 को जारी आदेश के तहत अब बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का पेट्रोल और डीजल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट या उपभोक्ता पंपों से ही खरीदना होगा। तेल विपणन कंपनियों और ईंधन रिटेलर्स को इस नियम को लागू करने के अधिकार दिए गए हैं।
सरकार ने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई संबंधी चुनौतियों के कारण ईंधन की उपलब्धता और वितरण पर असर पड़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम जरूरी हो गया था।
नए नियमों के तहत पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री केवल वाहन के फ्यूल टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) से मंजूर कंटेनरों तक सीमित रहेगी। साथ ही एक ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की अनुमति होगी। इस ईंधन को दोबारा बेचने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार का मानना है कि यदि बड़े उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में ईंधन खरीदते रहे तो स्थानीय स्तर पर कमी की स्थिति पैदा हो सकती है और आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसी को रोकने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की गई है।
आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान भी रखा गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को अलग से छूट दी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इस प्रतिबंध की अवधि को नए आदेश के जरिए आगे भी बढ़ाया जा सकता है।







