एफएनएन, उत्तराखंड : Haridwar Meeting हरिद्वार में आज जिला योजना समिति की बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस और बसपा विधायकों ने अपने क्षेत्र के प्रस्ताव एजेंडे में शामिल न किए जाने का आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रही है।
बैठक में क्या हुआ?
जिला प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में बैठक शुरू होने वाली थी, तभी विपक्षी विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और विरोध जताने लगे। कुछ ही देर में स्थिति इतनी बढ़ गई कि विधायकों ने एजेंडा फाइल तक फेंक दी और बैठक छोड़कर बाहर चले गए।
किन-किन विधायकों ने किया विरोध ?
विरोध करने वालों में कांग्रेस और बसपा के कुल 6 विधायक शामिल थे। इनमें मोहम्मद शहजाद समेत कई कांग्रेस विधायक मौजूद रहे। सभी ने बैठक हॉल के बाहर धरना दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
विधायकों के आरोप
विधायकों का कहना है कि:
- उनके क्षेत्रों के विकास प्रस्तावों को नजरअंदाज किया गया
- ठेकेदारों और अधिकारियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई
- 84 गांवों की बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं शामिल नहीं की गईं
कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत और ममता राकेश ने इसे जनहित की अनदेखी बताया।
मंत्री सतपाल महाराज का जवाब
मंत्री सतपाल महाराज ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी विभागों के प्रस्ताव नियम के अनुसार शामिल किए गए थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल विरोध के लिए हंगामा कर रहा है और कई बार समझाने के बावजूद विधायक बैठक में नहीं बैठे।
क्या है पूरा विवाद ?
यह विवाद मुख्य रूप से जिला योजना के एजेंडे को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि उनके सुझावों को नजरअंदाज किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी थी।
निष्कर्ष
हरिद्वार की इस बैठक में हुआ हंगामा राजनीतिक टकराव को साफ दर्शाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और क्या विपक्ष के प्रस्तावों पर दोबारा विचार होता है।






