एफएनएन, रामनगर : उत्तराखंड के रामनगर निवासी और अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाज के कप्तान अजय पंत इन दिनों ब्रिटेन में चल रहे एक कानूनी मामले को लेकर चर्चा में हैं। ब्रिटेन की जांच एजेंसी ने उन पर रूस से जुड़े तेल परिवहन नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस मामले के सामने आने के बाद उनके परिवार ने भारत सरकार से सहायता और कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार 38 वर्षीय अजय पंत एमवी स्मिर्टोस नामक तेल टैंकर के कप्तान थे। यह जहाज रूस के उस्त-लूगा बंदरगाह से कच्चा तेल लेकर भारत के गुजरात स्थित सिक्का पोर्ट की ओर रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष अभियान चलाकर जहाज को रोक लिया और जांच शुरू की।
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी का आरोप है कि संबंधित जहाज रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल परिवहन करने वाले नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। इसी आधार पर अजय पंत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्हें अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।
अजय पंत की पत्नी ऋतु पंत का कहना है कि उनके पति पिछले करीब 15 वर्षों से समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनका पेशेवर रिकॉर्ड हमेशा साफ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अजय केवल कंपनी के निर्देशों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे और उनका किसी भी कथित प्रतिबंध उल्लंघन से व्यक्तिगत संबंध नहीं है।
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए ऋतु पंत ने कहा कि यह केवल उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि उन सभी नाविकों और उनके परिवारों की चिंता का विषय है जो विदेशों में कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
मामले को लेकर उत्तराखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। राज्य के गृह सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि विदेश मंत्रालय को आवश्यक सहयोग के लिए पत्र भेजा गया है। साथ ही दिल्ली स्थित उत्तराखंड के क्षेत्रीय आयुक्त केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। भारतीय उच्चायोग द्वारा अजय पंत को कांसुलर सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।
फिलहाल संबंधित तेल टैंकर ब्रिटेन के तट के पास निगरानी में रखा गया है। जहाज पर मौजूद अन्य चालक दल के सदस्य जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। इस बीच रामनगर में अजय पंत के परिवार और स्थानीय लोगों की निगाहें अब आगामी अदालत की सुनवाई और भारत सरकार के प्रयासों पर टिकी हुई हैं। परिवार को उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें न्याय मिलेगा और अजय पंत जल्द सुरक्षित स्वदेश लौट सकेंगे।







