


एफएनएन, लखनऊ : लोकसभा चुनाव 2029 से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक संसद के निचले सदन में पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर विधेयक को लेकर रुख पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर ही प्रश्न खड़े किए हैं।
विधेयक के पारित न होने के बाद भाजपा नेता और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार देर रात लखनऊ में विधानभवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सपा और कांग्रेस के झंडे जलाए और विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। अपर्णा यादव, जो सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार से जुड़ी हैं, के इस कदम के बाद राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
अपर्णा यादव ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को रोकने का प्रयास किया जा रहा है और यह निर्णय “नारी शक्ति” के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह ने अपर्णा यादव के प्रदर्शन को “नौटंकी” बताते हुए आलोचना की।
हालांकि, सपा ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वह महिला आरक्षण का समर्थन करती है और कभी भी इसका विरोध नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि उसने हमेशा महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में रुख अपनाया है और किसी भी तरह के विरोध का समर्थन नहीं किया।
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