एफएनएन, हरिद्वार : शहर में सिटी अस्पताल के साझेदारों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर तूल पकड़ गया है. अस्पताल में साझेदार रहे एक डॉक्टर ने अपने ही साझेदारों पर फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर बैंक खाते संचालित कर लाखों रुपये का गबन, फर्जी का आरोप लगाते हुए धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है. ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
नया हरिद्वार कॉलोनी निवासी डॉ. सुमंतु विरमानी ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि वह साल 2000 से सिटी अस्पताल की फर्म में विधिवत साझेदार हैं. इसी फर्म के माध्यम से अस्पताल का संचालन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2005 को फर्म का पुनर्गठन हुआ, जिसमें उनके साथ ही सतीश विरमानी, विक्रम विरमानी, शकुंतला देवी, अमित विरमानी, लता मेहता उर्फ स्वर्ण लता मेहता और ऋचा ढोडी को भी साझेदार बनाया गया.
डॉ. विरमानी का आरोप है कि उनको बिना जानकारी दिए और बिना किसी सहमति के साल 2015 में फर्म के नाम पर एक बैंक की चंद्राचार्य चौक शाखा में एक खाता खोला गया, जिसे शिव कुमार कपूर और अन्य साझेदारों ने आपसी मिलीभगत से उनके फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए. इस खाते की जानकारी उनसे छिपाई गई और उनकी सहमति भी नहीं ली गई. उन्होंने बताया कि साल 2018 में उन्हें अवैध रूप से दुर्भावनापूर्ण साझेदारी फर्म से बाहर कर दिया गया. इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी कूटरचित साझेदारी विलेख तैयार कर एक बैंक में नया खाता खुलवाया, जिसमें उन्हें साझेदार के रूप में शामिल नहीं किया गया. आरोप है कि पांच जनवरी 2019 को आईडीबीआई खाते से 10 लाख 81 हजार रुपये निकालकर बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए.
ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह अधिकारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच की जा रही है। जांच के उपरांत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.





