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अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवकों पर भालू ने किया हमला, स्थानीय लोगों में दहश्त

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एफएनएन, पौड़ी : उत्तराखंड में वन्यजीवों के आतंक से लोग काफी परेशान है. अभी पौड़ी में गुलदार का ही आतंक देखने को मिल रहा है. वहीं भालू के हमलों के कारण भी स्थानीय लोग दहश्त में है. पौड़ी गढ़वाल के खिर्सू क्षेत्र में भालू ने दो युवक पर हमला किया है. दोनों की हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.

जानकारी के मुताबिक दोनों युवक अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे है. बताया जा रहा है कि दोनों युवक सुबह रोज की तरह अभ्यास के लिए जंगल की ओर निकले थे, तभी झाड़ियों में छिपे भालू ने उन पर अचानक हमला कर दिया.

आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाकर किसी तरह दोनों युवकों को भालू के चंगुल से बचाया. घायल युवकों को तत्काल श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है. वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर रोक लगाने की मांग की है.

जानकारी के अनुसार खिर्सू के माथीगांव निवासी आदर्श पुत्र विक्रम सिंह और कठूली निवासी आकाश सिंह पुत्र भागेश सिंह खिर्सू में रहकर आगामी अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे हैं. रोजाना की तरह गुरुवार सुबह भी दोनों युवक एक्सरसाइज और प्रैक्टिस के लिए घर से निकले थे. जब वे विजेंद्र सिंह के घर के पास मुख्य मार्ग से गुजर रहे थे, तभी झाड़ियों में छिपे एक भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया.

भालू के अचानक हमले से दोनों युवक जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए. आसपास मौजूद लोगों ने जब शोर सुना तो मौके की ओर दौड़े. उन्होंने डंडों और पत्थरों की मदद से किसी तरह भालू को भगाया और दोनों युवकों को उसके चंगुल से बाहर निकाला.

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में भालू और गुलदार की सक्रियता लगातार बढ़ रही है. आए दिन खेतों, बगीचों और यहां तक कि गांव के रास्तों में भी जंगली जानवरों की मौजूदगी देखने को मिल रही है.

लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते अब ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने जंगली जानवरों के आतंक पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. लोगों ने यह भी मांग की है कि भालू को पकड़कर जंगल के गहरे क्षेत्र में छोड़ा जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो.

वही वन दरोगा नागदेव रेंज पौड़ी जगदीश नेगी ने बताया कि घटना की प्राथमिक सूचना उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और घायल युवकों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

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