एफएनएन, चमोली (उत्तराखंड) : Badrinath Dham आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब भगवान बदरी विशाल के प्रतिनिधि स्वरूप उद्धव जी और देवताओं के खजांची कुबेर जी की पवित्र डोलियां बद्रीनाथ धाम पहुंच गईं। डोलियों के आगमन के साथ ही पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा और कपाट खुलने की तैयारियां तेज हो गई हैं।
इससे पहले सुबह योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर में वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद इस पावन यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा में भगवान बदरी विशाल की उत्सव डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, पवित्र गाडू घड़ा (तिल तेल कलश) और रावल (मुख्य पुजारी) सहित अन्य धार्मिक प्रतीक शामिल रहे।
पूरे यात्रा मार्ग में अद्भुत आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। भारतीय सेना के बैंड की मधुर धुनों और “जय बद्री विशाल” के जयकारों के बीच यह पवित्र काफिला आगे बढ़ता रहा। रास्ते में विष्णुप्रयाग, लामबगड़ और हनुमानचट्टी जैसे प्रमुख पड़ावों पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने डोलियों का पारंपरिक स्वागत किया और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतकाल में जब बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं, तब भगवान विष्णु के प्रतिनिधि उद्धव जी और कुबेर जी पांडुकेश्वर में विराजमान रहते हैं। चारधाम यात्रा के पुनः आरंभ से पूर्व इनका धाम लौटना एक महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है, जो दिव्य व्यवस्था की निरंतरता का प्रतीक है।
अब 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में बद्रीनाथ मंदिर के कपाट विधिवत श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस पावन क्षण का देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम पहुंचेंगे। वे मास्टर प्लान के तहत चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे और कपाट खुलने के ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे।
डोलियों के धाम पहुंचने के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर भक्ति, आस्था और दिव्यता से ओत-प्रोत हो उठा है। अब सभी की निगाहें 23 अप्रैल को होने वाले इस भव्य और पवित्र क्षण पर टिकी हैं, जब बदरी विशाल अपने भक्तों को दर्शन देंगे।






