एफएनएन, रुद्रप्रयाग : kedarnath-dham श्रद्धा, आस्था और दिव्यता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल श्री केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय श्री केदार” के उद्घोष से गूंज उठा।
कपाट खुलने के साथ ही आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न कराई गई, जो इस धाम के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाती है।
इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। सिख रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों ने इस अलौकिक क्षण को और भी दिव्य बना दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ धाम न केवल सनातन आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा भी नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।
श्रद्धालुओं से सेवा-भाव की अपील
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति सेवा और आतिथ्य का भाव बनाए रखें।
51 क्विंटल फूलों से सजा धाम, पुष्पवर्षा से भावुक हुए श्रद्धालु
कपाट खुलने के अवसर पर बाबा केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और भाव-विभोर हो उठा।
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से होते हुए गुप्तकाशी, फाटा और गौरीकुंड मार्ग से एक दिन पूर्व ही धाम पहुंच चुकी थी। प्रातः 5 बजे से पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हुई और ठीक 8 बजे विधिवत कपाट खोल दिए गए।
इस दौरान रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी. गंगाधर, विधायक आशा नौटियाल समेत बड़ी संख्या में धर्माचार्य, तीर्थ पुरोहित और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, बाबा केदारनाथ के कपाट खुलते ही देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा — और शुरू हो गई एक और दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक चारधाम यात्रा।






