एफएनएन, सहारनपुर : PNB उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़े 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। मंगलवार को NIA ने उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र निवासी नीतू पुत्र सरफराज को गिरफ्तार किया है।
NIA के मुताबिक, नीतू मामले के मुख्य आरोपी आदेश चौधरी और अन्य आरोपियों के संपर्क में था। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एजेंसी अब नकली करेंसी के बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचने की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने से मचा हड़कंप
यह मामला 29 अगस्त को सामने आया था। सदर बाजार थाना पुलिस को PNB की करेंसी चेस्ट में 7.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने की सूचना मिली थी। जांच आगे बढ़ने पर नकली नोटों की कुल रकम बढ़कर 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
प्रारंभिक जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी। इसके बाद बैंक की ओर से तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था।
29 अगस्त को दर्ज हुई थी FIR
मामले में सदर बाजार थाने में 29 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 178 के तहत कार्रवाई शुरू हुई। बाद में NIA ने जांच अपने हाथ में लेते हुए 3 सितंबर को मामले को RC-02/2026/NIA/LKW के रूप में दर्ज किया।
जांच अपने हाथ में लेने के बाद NIA ने आरोपियों की भूमिका और नकली नोटों की बैंकिंग चैनल तक पहुंचने से जुड़े पहलुओं की पड़ताल शुरू की।
अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी
NIA ने 7 सितंबर को नामजद आरोपी अमित कुमार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15 सितंबर को आदेश चौधरी को गिरफ्तार किया गया। आदेश चौधरी सहारनपुर स्थित PNB करेंसी चेस्ट में संविदा पर ड्राइवर के तौर पर काम कर चुका था।
इसके बाद 20 सितंबर को एजेंसी ने मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया। NIA के अनुसार, दोनों आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी बताए गए हैं।
मंगलवार को भगवानपुर निवासी नीतू की गिरफ्तारी के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या पांच हो गई।
आरोपियों के संपर्क और नेटवर्क की जांच
NIA के अनुसार, नीतू मुख्य आरोपी आदेश चौधरी और अन्य आरोपियों के संपर्क में था। एजेंसी अब उससे पूछताछ के जरिए आरोपियों के बीच संपर्क, नकली नोटों की कथित सप्लाई और उनके सर्कुलेशन में उसकी भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नकली करेंसी का स्रोत क्या था और वह किस माध्यम से सहारनपुर की करेंसी चेस्ट तक पहुंची।
बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?
इस पूरे मामले में NIA के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी बैंक की करेंसी चेस्ट तक आखिर कैसे पहुंची।
एजेंसी नकली नोटों के स्रोत से लेकर उनके सहारनपुर पहुंचने और बैंकिंग सिस्टम में संभावित सर्कुलेशन तक की कड़ियों को जोड़ रही है। इसके लिए करेंसी की पैकिंग, गिनती, रखरखाव और आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली नोट बाहर से करेंसी चेस्ट में पहुंचे या फिर असली नोटों को हटाकर उनकी जगह कथित तौर पर नकली नोट रखे गए।
तीन बैंककर्मी भी जांच के घेरे में
मामला सामने आने के बाद PNB के तीन कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी, जिसके बाद बैंक ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अब NIA की जांच बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ उन बाहरी लोगों तक भी पहुंच रही है, जिनके आरोपियों और करेंसी की कथित आवाजाही से संपर्क रहे हैं।







