एफएनएन, Dehradun : देहरादून में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन फिलहाल पूरी तरह बंद है। ड्राइवरों की हड़ताल के चलते बसें अलग-अलग रूट पर दौड़ने के बजाय ISBT ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कंपनी परिसर में खड़ी हैं। इससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ड्राइवरों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
बसों का संचालन बंद होने की मुख्य वजह ड्राइवरों की हड़ताल बताई जा रही है। कर्मचारियों के मुताबिक, कुछ ड्राइवरों को अचानक नौकरी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया और विरोध में सभी रूटों की बसों का संचालन रोक दिया गया।
वहीं देहरादून स्मार्ट सिटी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तीरथ पाल सिंह के अनुसार, कुछ ड्राइवरों के खिलाफ अनुशासनहीनता से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बस संचालन की आर्थिक स्थिति पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों का कहना है कि विवाद केवल ड्राइवरों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, बस संचालन करने वाली कंपनी में लंबे समय से वेतन भुगतान और कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं।
देहरादून में वर्ष 2021 से 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन निजी कंपनी eveytrans के माध्यम से किया जा रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि कई रूटों पर यात्रियों की संख्या कम होने के कारण बसों का संचालन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शहर में शुरू की गई ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाएगा।
कर्मचारियों ने लगाया वेतन में देरी का आरोप
बस कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई बार समय पर वेतन नहीं मिलता। उनका कहना है कि कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर स्मार्ट सिटी प्रशासन से शिकायतें भी की गई हैं।
हटाए गए ड्राइवरों में शामिल गुलशन का कहना है कि उन्हें और उनके कुछ साथियों को अचानक काम से हटा दिया गया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने के बाद ड्राइवरों ने सामूहिक रूप से सभी रूटों पर बसों का संचालन बंद कर दिया।
थर्ड पार्टी कंपनी से संचालन का भी दावा
विवाद में बसों के संचालन की जिम्मेदारी और कथित थर्ड पार्टी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारी नेता बन्देश नौटियाल का दावा है कि स्मार्ट सिटी द्वारा जिस कंपनी को बस संचालन की जिम्मेदारी दी गई है, उसके बजाय किसी अन्य थर्ड पार्टी कंपनी के माध्यम से काम कराया जा रहा है।
बन्देश नौटियाल के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर उन्होंने जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी मुलाकात की है। उनका दावा है कि बातचीत में बस संचालन में थर्ड पार्टी की भूमिका का मुद्दा सामने आया। हालांकि, स्मार्ट सिटी अधिकारियों को इस व्यवस्था की जानकारी होने से इनकार किए जाने की बात भी उन्होंने कही है।
कर्मचारी नेता का आरोप है कि करीब पांच ड्राइवरों के साथ बड़ी संख्या में परिचालकों को भी हटाया गया है। साथ ही उन्होंने कई रूटों पर कम यात्रियों के बावजूद बस संचालन और व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है।
UKD ने स्मार्ट सिटी परियोजना पर मांगी जांच
इलेक्ट्रिक बसों का विवाद अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। उत्तराखंड क्रांति दल ने बस संचालन के साथ-साथ पूरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
UKD नेता राजेंद्र सिंह बिष्ट का आरोप है कि यदि अधिकृत कंपनी के बजाय किसी दूसरी कंपनी के जरिए बसों का संचालन कराया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं और आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं का हवाला देते हुए करीब 1500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
स्मार्ट सिटी की ग्रीन ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का भविष्य क्या?
देहरादून में एक साथ 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बंद होना केवल ड्राइवरों की हड़ताल तक सीमित मामला नहीं रह गया है। इस विवाद ने कर्मचारियों की नौकरी, वेतन भुगतान, बस रूट की उपयोगिता, संचालन की आर्थिक व्यवहार्यता और अधिकृत कंपनी की भूमिका जैसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतिम दौर में पहुंचने के बीच अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि इलेक्ट्रिक बसों की यह व्यवस्था आगे किस तरह चलेगी। क्या देहरादून को ऐसा सार्वजनिक परिवहन मॉडल मिल पाएगा, जो आर्थिक रूप से टिकाऊ होने के साथ कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और यात्रियों के लिए भरोसेमंद भी हो?








