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पुलिस जांच में उजागर हो सकते हैं सफेदपोश सूदखोरों के नाम

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  • गल्ला मंडी में फायरिंग की वजह बनी थी सूदखोरी
  • बिना किसी रजिस्ट्रेशन के कारोबार कर रहे थे व्यापारी

एफएनएन, रुद्रपुर : गल्ला मंडी में टायर की दुकान पर फायरिंग के मामले में खुलासे के बाद तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा सवाल यह है कि सूदखोरी से जुड़े इस मामले में कारोबार बिना किसी लाइसेंस के वर्षों से किया जा रहा था। जहां पुलिस एक ओर इस घटना में शामिल शूटरों और साजिश कर्ताओं की तलाश में जुटी है, वहीं जांच का हिस्सा यह भी है कि बिना किसी रजिस्ट्रेशन के आरोपियों को मोटे ब्याज के साथ रकम कैसे दी गई और उस पर गलत तरीके से ब्याज कैसे लगा दिया गया। आपको बता दें कि 29 दिसंबर की शाम गल्ला मंडी स्थित गुरुनानक टायर की दुकान में फायरिंग की गई थी। दुकान स्वामी बरार कॉलोनी निवासी निरमनजीत सिंह ने इस मामले में एक करोड़ की रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में 7 जनवरी को पुलिस ने घास मंडी, रूद्रपुर निवासी गौरव उर्फ गोलू और अर्जुनपुर निवासी जसवीर सिंह उर्फ जस्सी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने अपने साथी सहजदीप उर्फ गुल्लू निवासी प्रीत विहार रुद्रपुर और मनप्रीत उर्फ गोपी निवासी बहेड़ी का नाम भी बताया था। उनका कहना था कि निरमनजीत और जगजीवन ब्याज पर रुपए देने का काम करते हैं। ब्याज पर रुपए लेने की वजह से ही गुल्लू का मकान भी बिक गया था। दोगुना कर्ज चुकाने के बाद भी उस पर अभी लाखों रुपए के मूल कर्ज की रकम बकाया है। बड़ा सवाल यह है कि टायर कारोबारी निरमनजीत और जगजीवन वर्षों से ब्याज पर देने का काम कर रहे थे, लेकिन इसकी खबर किसी को न थी। न तो इन दोनों ने साहूकारी अधिनियम में कोई पंजीकरण कराया है और न ही उनके पास कोई रजिस्ट्रेशन है। ऐसे में घटना के पीछे का कारण अवैध सूदखोरी ही है। पुलिस इस मामले में जांच में जुटी हुई है। यह माना जा रहा है कि जल्द ही व्यापारियों पर इस मामले में कार्यवाही हो सकती है। एसपी सिटी देवेंद्र पिंचा ने खुलासे के बाद ऐसे संकेत भी दिए थे।

15 लाख के बदले दिए 35 लाख, 16 लाख अभी भी बकाया

पुलिस की गिरफ्त में आए जसवीर उस जस्सी ने घटना के पीछे ब्याज की रकम को ही रंजिश बताया है। जसवीर का कहना है कि निरमनजीत और उसका मामा जगजीवन ब्याज पर रुपए देते हैं। उसका कहना है कि कुछ समय पहले उसके पिता अमरजीत सिंह ने भी ब्याज पर ₹1500000 लिए थे। अब तक वह ₹3500000 दे चुका है, लेकिन 16.30 लाख रुपए का कर्जा अभी भी बरकरार है। पुलिस की गिरफ्त से बाहर सहजदीप उर्फ गुल्लू के पिता दलजीत सिंह ने भी ब्याज पर कर्ज लिया था। कर्ज ना चुका न पाने की वजह से गुल्लू का मकान बिक गया। इसके बाद से यह लोग प्रीत विहार में एक कॉलोनी में किराए पर रह रहे हैं।

सफेदपोश कर रहे हैं अवैध तरीके से सूदखोरी का कारोबार

शहर के कई सफेदपोश ब्याज पर रुपये देने का अवैध तरीके से लंबे समय से कारोबार कर रहे हैं। यह लोग कर्ज देने से पहले हस्ताक्षर युक्त खाली चेक और स्टैंप ले लेते हैं और फिर दी गई रकम पर 12 फीसद तक मासिक व्यास लगाते हैं। ब्याज वसूली का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। मूल रकम से 3 से 4 गुना अधिक ब्याज चुकाने के बाद भी जब व्यक्ति पर कर्जा बरकरार रहता है तो उस पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। सबूत के तौर पर उससे लिए गए खाली चेक को भरकर बाउंस कराया जाता है ताकि उससे मुकदमे को बल मिल सके। इसके बाद कर्ज लेने वाले के प्लाट और मकान पर कब्जा आम बात हो गई है।

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