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Uttarakhand को अब तक नहीं मिला परिसंपत्तियों का पूरा हक, यूपी पर हजारों करोड़ रुपये बकाया

एफएनएन, देहरादून : Uttarakhand गठन के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राज्य और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों और वित्तीय देनदारियों का विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। राज्य सरकार का कहना है कि कई विभागों से जुड़े करोड़ों रुपये अब भी उत्तर प्रदेश पर बकाया हैं, जिनका भुगतान लंबे समय से लंबित है।

सरकार के अनुसार, उत्तराखंड वन विकास निगम ने उत्तर प्रदेश वन विकास निगम से करीब 77 करोड़ रुपये के ब्याज की मांग उठाई है। यह ब्याज लगभग 20 वर्षों से लंबित राशि से जुड़ा बताया जा रहा है। इस संबंध में शासन स्तर पर उत्तर प्रदेश को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है।

इसी तरह सिंचाई विभाग से जुड़ी परिसंपत्तियों के बंटवारे और भुगतान को लेकर भी दोनों राज्यों के बीच लगातार बातचीत जारी है। हालांकि कई मामलों में अभी भी सहमति नहीं बन पाई है और उत्तराखंड सरकार अपने दावों पर कायम है।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्षों से लंबित परिसंपत्ति विवाद का जल्द समाधान निकलेगा और राज्य को उसका बकाया धन प्राप्त होगा।

ऊर्जा विभाग से जुड़े कुछ मामलों में THDC परियोजनाओं पर पूर्व में किए गए निवेश और वित्तीय दावों की भी समीक्षा की जा रही है। पुनर्गठन विभाग विभिन्न विभागों की रिपोर्ट तैयार कर रहा है, ताकि सभी लंबित वित्तीय दावों को एक साथ उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जा सके।

सबसे बड़ा मुद्दा पेंशन देनदारी का है। वित्त विभाग के अनुसार, वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान उत्तर प्रदेश पर 2,261 करोड़ रुपये की देनदारी दर्ज की गई थी, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसके अलावा सिविल डिपॉजिट मद में करीब 440 करोड़ रुपये भी बकाया बताए गए हैं। इन मामलों में भी जल्द औपचारिक प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है।

वहीं, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने इस मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र—तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद राज्य को उसका पूरा अधिकार नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उत्तर प्रदेश सरकार ने न्याय किया और न ही केंद्र सरकार ने प्रभावी हस्तक्षेप किया।

राज्य सरकार का कहना है कि सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जा रहा है और उत्तराखंड के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

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