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Uttarakhand के 2003 के चर्चित दुष्कर्म मामले में पीड़िता ने उठाई CBI जांच की मांग, बेटे को पिता का नाम और न्याय दिलाने की गुहार

एफएनएन , देहरादून : उत्तराखंड का वर्ष 2003 का चर्चित नाबालिग दुष्कर्म मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले को लेकर प्रदेश में चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच पीड़िता खुद देहरादून पहुंचीं और प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। उन्होंने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मामले की सीबीआई जांच कराने और डीएनए टेस्ट की मांग की है। साथ ही अपने बेटे को न्याय दिलाने और उसे पिता का नाम दिलाने की गुहार लगाई है।

पीड़िता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल असम लौट जाएंगी, लेकिन जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, तब तक उत्तराखंड आती रहेंगी।

पीड़िता बोलीं- बेटे को न्याय मिलने तक उत्तराखंड आती रहूंगी

देहरादून प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए पीड़िता ने कहा कि वह केवल अपनी बात रखने के लिए उत्तराखंड आई हैं और इसके बाद वापस असम लौट जाएंगी। उन्होंने कहा कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह उत्तराखंड आती रहेंगी।

पीड़िता ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि वह उत्तराखंड में नहीं रुक सकतीं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा है। उन्होंने बताया कि जब उनके साथ कथित घटना हुई थी, उस समय उन्हें उत्तराखंड में कदम नहीं रखने की सख्त हिदायत दी गई थी।

सीएम धामी से लगाई न्याय दिलाने की गुहार

पीड़िता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह अंकिता भंडारी मामले में न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया, उसी तरह उन्हें भी न्याय दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर भरोसा करके ही वह अपनी बात रखने के लिए उत्तराखंड आई हैं।

उनकी मुख्य मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और उनके बेटे को न्याय मिले। उन्होंने डीजीपी से सीबीआई जांच कराने की मांग भी दोहराई।

राजनीतिक बयानबाजी पर जताई नाराजगी

मामले को लेकर उत्तराखंड में लगातार हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर पीड़िता ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल करके राजनीति नहीं की जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई उनके नाम को लेकर बयानबाजी करेगा तो वह उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगी।

महेंद्र भट्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वह महेंद्र भट्ट नाम के किसी व्यक्ति को नहीं जानती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका डीएनए टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं है।

पीड़िता ने 2003 की घटना को लेकर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़िता ने वर्ष 2003 में हुई कथित घटना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, घटना के समय उनकी उम्र महज 16 साल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार के एक तत्कालीन मंत्री ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद उन्हें मानसिक चिकित्सालय में रखा गया और गर्भवती होने के दौरान भी उन्हें प्रताड़ित किया गया।

पीड़िता के अनुसार, वह तत्कालीन कैबिनेट मंत्री के यहां करीब डेढ़ महीने तक रही थीं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग होटलों में ले जाया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में जब उन्होंने तत्कालीन मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, तब भी उनके साथ जबरदस्ती की गई थी।

2016 की सीबीआई जांच पर भी उठाए सवाल

पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2016 में मामला दर्ज होने के बाद इसकी सीबीआई जांच हुई थी, लेकिन उन्होंने उस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनके पास एक कागज लाया गया था, जिस पर केवल हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद सीबीआई की कोई टीम उनसे मिलने नहीं आई।

उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि उस समय जांच किस तरह की गई थी। इसी वजह से अब वह मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच और डीएनए टेस्ट की मांग कर रही हैं।

बेटे को पिता का नाम और इंसाफ दिलाने की मांग

पीड़िता ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे अधिक जोर अपने बेटे को न्याय दिलाने पर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई अपने बेटे के अधिकार और उसे पिता का नाम दिलाने के लिए है। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस और मुख्यमंत्री से मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई करने की अपील की।

फिलहाल पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में है। उनके आरोपों की पुष्टि और जांच से जुड़े मौजूदा तथ्यों की आधिकारिक स्थिति संबंधित एजेंसियों के बयान और रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।

नोट: खबर में वर्णित दुष्कर्म और अन्य घटनाओं से जुड़े आरोप पीड़िता के बयानों पर आधारित हैं। इन्हें जांच या न्यायिक निष्कर्ष के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

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