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“मौसम सी बदलती दुनिया में….!”

संस्था की संरक्षक और देश की चर्चित कहानीकार श्रीमती निर्मला सिंह ने जिंदगी की परिभाषा गढ़ता अपना यह गीत प्रस्तुत किया तो पूरा सदन हर मक्ति पर तालियों और वाहवाह से गूंजता रहा,,, मौसम सी बदलती दुनिया में इन्सान के रूप बदलते हैं, जीवन का सफऱ तो लंबा है, हम धूप-छांव में चलते हैं।