प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक (शोध) ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान तकनीक पुरानी लेकिन आज भी प्रासंगिक है। इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा मवेशियों को बांझपन की समस्या से छुटकारा दिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जर्मप्लाज्म तकनीक में सुधार होगा तो मवेशियों की प्रजनन क्षमता भी जरूर बढ़ेगी। उन्होंने मवेशियों में बांझपन के प्रमुख कारणों एनेस्ट्रस और रिपीट ब्रीडर्स के बारे में भी विस्तार से प्रकाश डाला।
भारत में एचएमपीवी वायरस का पहला केस पिछले सोमवार को कर्नाटक के बंगलूरू में मिला था। तब से 11 जनवरी शनिवार शाम तक भारत में कुल 16 एचएमपीवी संक्रमित रोगी मिल चुके हैं।
एफएनएन ब्यूरो/नई दिल्ली/World suicide Prevention Day: "अपने करीबियों और आसपास रहने वालों के मिजाज़ में अचानक हुए बदलाव को संज्ञान में लेकर समय रहते उचित कदम उठा लिए जाएं तो इनमें से कई प्रियजनों को आत्महत्या करने से रोका भी जा सकता है।"