मुख्य अतिथि गोला गोकर्णनाथ के वरिष्ठ कवि डॉ. द्वारिका प्रसाद रस्तोगी ने कहा, "सुरेश सौरभ की कहानियाँ भारतीय जनमानस की चेतना और चिंतन की गहरी संवेदना से जुड़ी हैं।" समीक्षा करते हुए कवि विनोद शर्मा 'सागर' ने कहा, "संग्रह की कहानियाँ मानवीय संवेदना एवं संचेतना का साक्षात्कार कराती हैं। सौरभ जी की समाज की परिस्थतियों पर गहरी पकड़ है।"
इन्हें पढ़ने के बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो लेखकों ने बहुत नजदीक से इनकी समस्याओं को देखा हो। आजकल के इस दौर में भला इन पर कौन लिखना चाहता है? मैं इस लघुकथा संग्रह के सभी लेखकों को साधुवाद देता हूं, जिनकी लघुकथाएं सीधे दिल में उतरती हैं और एक चुभन छोड़ देती हैं।