फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। प्रतिष्ठित ‘साहित्यिक संस्था ‘साहित्य सुरभि’ की हर माह के तीसरे रविवार को होने वाली नियमित मासिक कवि गोष्ठी संस्थाध्यक्ष रामकुमार कोली के आवास पर आयोजित की गई। बरेली के वरिष्ठतम साहित्यकार स्मृतिशेष आदरणीय राममूर्ति गौतम ‘गगन’ द्वारा वर्ष 1994 में स्थापित की गई इस प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था की 377वीं मासिक...
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‘साहित्य सुरभि’ की 376वीं मासिक काव्य गोष्ठी में 25 कवियों ने चढ़ाए अनूठे काव्य प्रसून
फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था’ साहित्य सुरभि’की 376वीं मासिक काव्य गोष्ठी शहर के वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ के निवास पर उन्हीं की अध्यक्षता में संपन्न हुई। गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा सहारनपुर और गजल के सशक्त हस्ताक्षर एवं बरेली के दुष्यंत कुमार कहे जाने वाले विशिष्ट...
…कदम-कदम पर खड़े शिकारी दोनों हाथों जाल लिये!
बरेली में प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य सुरभि की 375वीं नियमित मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने बिखेरे चटख रंग फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘साहित्य सुरभि’ की 375वीं नियमित मासिक काव्य गोष्ठी रविवार सायं चर्चित रंगकर्मी, उत्कृष्ट साहित्यकार, फिल्मकार, संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश ठाकुर के राजीव गांधी नगर, मणिनाथ बरेली स्थित...
“ये लगता है नदी किनारे फिर से रांझा छला गया…!”
साहित्यिक संस्था 'लेखिका संघ', बरेली के तत्वावधान में कवि राजेश गौड़ की अध्यक्षता तथा वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना के मुख्य आतिथ्य में सरस काव्य गोष्ठी काव्य का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ शारदे की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन से हुआ।
‘साहित्य सुरभि’ की 372वीं मासिक काव्य गोष्ठी में होली के रंगों में रँगे कवि
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड 'धीर' ने की। मुख्य अतिथि गजेन्द्र सिंह और विशिष्ट अतिथि-राम कुमार भारद्वाज अफ़रोज़' रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि-पत्रकार गणेश 'पथिक' एवं वरिष्ठ साहित्यकार रजत कुमार भी मंचासीन रहे। गोष्ठी का काव्यमय सफल संचालन संस्थाध्यक्ष राम कुमार कोली ने किया।
‘…सिर्फ खामोशियां कभी अच्छी नहीं होतींं!’
सीमा सक्सेना असीम ने कहा,,,
कुछ कह लिया करो कुछ सुन लिया करो, सिर्फ खामोशियाँ कभी अच्छी नहीँ होतीं।
वसंतोत्सव एवं महाप्राण ‘निराला’ जयंती पर क्रांतिकारी छात्र परिषद की रससिद्ध काव्य गोष्ठी एवं रजत कुमार की पुस्तक ‘कूड़ा क्या है’ का विमोचन
काव्य गोष्ठी में डॉ. महेश मधुकर, रामकुमार कोली, रजत कुमार, गांधी मोहन सक्सेना, रामधनी निर्मल, रामकुमार भारद्वाज 'अफरोज़', डॉ. रामशंकर शर्मा 'प्रेमी', प्रताप मौर्य 'मृदुल', रीतेश साहनी, उपमेंद्र सक्सेना एवं श्रीमती नीरज और अन्य रससिद्ध कवियों ने अपनी यादगार-श्रेष्ठ कविताएं, गीत, छंद सुनाकर खूब वाहवाही तो बटोरी ही; कालजयी-महान कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' को भावभरे, काव्यमय श्रद्धासुमन भी समर्पित किए। कवियों ने ऋतुराज वसन्त के स्वागत में भी अपनी एक से बढ़कर एक कविताएं प्रस्तुत कीं और समारोह को स्मरणीय बना दिया।
संस्थापक अध्यक्ष मूर्धन्य साहित्यकार गोलोकवासी ‘गगनजी’ को समर्पित रही ‘साहित्य सुरभि’ की 370वीं श्रद्धांजलि काव्य गोष्ठी
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठतम कवि-साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ 'धीर' की इस ग़ज़ल के हर शेअर पर काव्य रसिक देर तक वाहवाह करते और तालियां बजाते रहे-
तुम क्या गए चमन के नज़ारे चले गए।
महफिल से उठके दर्द के मारे चले गए।
पानी के साथ बहके किनारे चले गए।
जैसे भी गुजरी उम्र गुजारे चले गए।
नववर्ष 2025 की अगवानी में कवियों ने बहाई नवरसों की काव्य सुरसरि, सुधी श्रोताओं ने घंटों लगाए गोते
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ 'धीर' ने की। मुख्य अतिथि विनय सागर जायसवाल एवं विशिष्ट अतिथि कवयित्री शिखा चंद्रा रहीं।
…एक बलिदान रच देता अमर इतिहास के पन्ने!
एफएनएन ब्यूरो, बरेली। शहर की प्राचीन-शीर्ष साहित्यिक संस्थाओं में से एक 'साहित्य सुरभि' की 365वीं नियमित मासिक गोष्ठी रविवार सायं प्रह्लाद नगर मणि नाथ स्थित हिंदी भवन में संस्थापक अध्यक्ष राममूर्ति गौतम 'गगन' के संयोजकत्व में आयोजित की गई।









