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आर्थिक तंगी से निपटने के लिए अपहरण कर लेखपाल को मार डाला, दो आरोपी गिरफ्तार

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दो हत्यारोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, पीपीटी के जरिए स्क्रीन लगाकर एसएसपी ने समझाई kidnapping-murder Mistry

एफएनएन ब्यूरो, बरेली/Workout of Lekhpal Kkdnapping & murder case: फरीदपुर तहसील में ताहसीत लेखपाल के अपहरण और हत्या के मामले में जहां परिवार ने फरीदपुर तहसील प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, वहीं विधानसभा में विपक्ष भी सरकार को घेराबंदी का मौका नहीं चूक रहा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर योगी सरकार पर सीधा हमला बोला है।

  

मृतक लेखपाल मनीष कश्यप का फाइल फोटो

लेखपाल मनीष कश्यप हत्याकांड का पुलिस लाइन सभागार में सोमवार को एसएसपी अनुराग आर्य ने खुलासा कर दिया। पीपीटी के जरिये स्क्रीन लगाकर हत्याकांड से जुड़े साक्ष्य पेश किए गए। इसमें हत्यारोपी ओमवीर और उसके मामा नन्हें के बीच वार्ता की रिकॉर्डिंग अहम सबूत के रूप में पेश की गई।

खुलासे पर उठ रहे सवालों पर भी बोले एसएसपी

खुलासे पर उठ रहे सवालों पर भी एसएसपी श्री आर्य मुखर दिखे। साफ किया कि बाकी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद घटनाक्रम से जुड़ी जो भी जानकारी सामने आएगी, पुलिस उसे भी जरूर सार्वजनिक करेगी।

पुलिस गिरफ्त में लेखपाल मनीष के दो गुनाहगार

अपनी तेजतर्रार-स्पष्टवादी छबि और बरेली पुलिस के चेहरे-मोहरे को बहुत तेजी से स्मार्ट-जवाबदेह शक्लो-सूरत में ढालने की अपनी मुहिम में पूरी शिद्दत-ईमानदारी और निर्ममता से जुटे एसएसपी श्री आर्य ने कहा कि कॉल रिकार्डिंग, लोकेशन और बैंक खातों की जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य आरोपी ओमवीर बेहद आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। बतौर बानगी इस साल सितंबर में उसके खाते में सिर्फ 40 रुपये रह गए थे। ये भी उसने ऑनलाइन एप से खर्च कर लिए। पांच रुपये का ब्याज बैंक ने उसे दिया जो किसी लोन में कट गया। ऐसे में दुबला-पतला मनीष उसे अपहरण कर फिरौती के जरिए मोटी रकम जुटाने सा सीधा-आसान लक्ष्य नज़र आया। उम्मीद थी कि मामला ठंडा पड़ते ही चार से पांच लाख रुपये घर वालों से मांगेंगे, तो दो से तीन लाख रुपये तो आसानी से मिल ही जाएंगी। बकौल एसएसपी, फिरौती की रकम हाथ में आने से पहले ही पुलिस की गिरफ्त में फंस जाने की बात तो हत्यारोपी ओमवीर ने शायद सपने में भी नहीं सोची थी।

जिन्न ने दिया था इशारा- अभी हरकत की तो फंस जाओगे
एसएसपी ने मीडिया कर्मियों को लाउडस्पीकर पर दो कॉल रिकार्डिंग्स भी सुनवाईं जिसमें ओमवीर की बात रिश्ते के मामा नन्हें कश्यप से हो रही है। हत्या के कुछ दिन बाद हुई दोनों की ये बातचीत पुलिस ने टेप कर ली थी। इसमें ओमवीर लेखपाल के परिवार को लेखपाल के ही उस नबर से कॉल कर रुपये मंगाने को उतावला दिख रहा है जो सिम मोबाइल फेंकने के बाद उसने सावधानी से रख लिया था। प्लान था कि इसी नंबर से कॉल कर फिरौती चलती हुई ट्रेन में ली जाएगी। पांच दिसंबर को यह सिम एक मोबाइल में डालकर भी देखा गया लेकिन इनकमिंग और आउटगोइंग सब बंद थी तो ओमवीर इसे रिचार्ज कराने को उतावला था। मामा नन्हें झाड़-फूंक भी करता था और खुद पर किसी जिन्न का साया बताता था। उसने अपने जिन्न से बात होने का जिक्र कर अभी खतरा बताया।

परिवार ने सवाल उठाए तो विपक्ष ने सरकार को घेरा

बहरहाल, बरेली में फिरौती की खातिर युवा लेखपाल के 27 सितंबर को अपहरण और सिर काटकर निर्मम हत्या कर देने और शव नाली में फेंक देने के मामले में पूरे एक पखवाड़े तक पुलिस को भनक भी नहीं लगने पर जहां उसके परिवार ने फरीदपुर तहसील प्रशासन पर सवाल उठाए हैं; वहीं सूबे में कानून-व्यवस्था चौपट पड़ी होने का संगीन इल्जाम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री-सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार पर कस-कसकर तीर चलाए हैं।

सरकारी भ्रष्टाचार और भूमाफिया यूपी पर काबिज-सपा सुप्रीमो

एक्स सीएम अखिलेश यादव ने अपनी ताजा फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि बरेली में कई दिनों से लापता लेखपाल का सिर नाले में मिलने के बाद परिजनों ने यूपी में इन दिनों चल रही उस सांठगांठ से भी पर्दा उठाने की कोशिश की है, जिसके एक छोर पर सरकारी भ्रष्टाचार है और दूसरे छोर पर भूमाफ़िया। भूमाफिया ही उत्तर प्रदेश की सरकार चला रहे हैं, बाकी सब तो मुखौटे हैं।

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