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…तो सितंबर में खत्म हो जाएगा कोराना ! भारत वैक्सीन बनाने के करीब

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एफएनएन, नई दिल्ली। भारत में कोरोना का इलाज/ वैक्‍सीन ढूंढने पर रिसर्च जारी है। देश भर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जाइडस कैडिला नामक भारतीय कंपनी ने कोरोना की दूसरी संभावित वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू कर दिया है। कंपनी की ओर से बुधवार को इस बात की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा है कि  ZYCoV-D, प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन सुरक्षित को माना गया है। इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में इम्युनिटी टेस्ट के नतीजे काफी सकारात्मक आए हैं।

बताया जा रहा है कि ह्यूमन ट्रायल में जाइडस कैडिला एक हाजर से ज्यादा लोगों का परीक्षण करेगी। इसके लिए देश में कई क्लीनिकल रिसर्च सेंटर बनाए गए हैं। बता दें कि इससे पहले हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने साथ मिल कर पहली भारतीय कोरोना वैक्सीन तैयार की थी। इसका ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है। ये ह्यूमन ट्रायल हैदराबाद के निम्स में किया जा रहा है।

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15 अगस्त तक सामने आएंगे वैक्सीन के परिणाम

इसके अलावा आईसीएमआर ने दूसरे संस्थानों को भी ट्रायल के लिए पत्र लिखा है। निम्स के डायरेक्ट डॉक्टर मनोहर ने कहा है कि हम वैक्सीन के ट्रायल के लिए स्वस्थ व्यक्तियों का चयन करेंगे। और उनके ब्लड का सैंपल लेंगे। इसके बाद इनके सैंपल दिल्ली में चुने गई लैब्स को भेजे जाएंगे। अहर उनकी तरफ से पॉजिटिव परिणाम मिले तो इसे ह्यूमन ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसके परिणाम 15 अगस्त तक सामने आ जाएंगे। भारत में वास्तविक रूप से महामारी दो मार्च से शुरू हुई थी और तब से कोविड-19 के पॉजिटिव मामले बढ़ते ही चले गये।

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सितंबर में खत्म हो जाएगा संक्रमण

कोविड-19 महामारी मध्य सितंबर के आसपास भारत में खत्म हो सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह दावा किया है, जिन्होंने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये गणितीय प्रारूप पर आधारित विश्लेषण का सहारा लिया। विश्लेषण से यह प्रदर्शित होता है कि जब गुणांक 100 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा तो यह महामारी खत्म हो जाएगी। यह विश्लेषण ऑनलाइन जर्नल एपीडेमीयोलॉजी इंटरनेशनल में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजएसएच) में उप निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ अनिल कुमार और डीजीएचएस में उप सहायक निदेशक (कुष्ठ रोग) रूपाली रॉय ने किया है। उन्होंने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये बेली के गणितीय प्रारूप का इस्तेमाल किया। यह गणितीय प्रारूप किसी महामारी के पूर्ण आकार के वितरण पर विचार करता है, जिसमें संक्रमण और इससे उबरना, दोनों ही शामिल हैं।

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