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रुहेलखंड क्षेत्र की सच्ची-खरी गन्ना-सहकारिता राजनीति के निर्विवाद ‘भीष्म पितामह’ हैं चौधरी छत्रपाल सिंह

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बात चली तो सहकार भारती जिलाध्यक्ष और डीसीबी बरेली के पूर्व चेयरमैन चौधरी छत्रपाल ने खुद ही खोल डालीं विभाग में दीमक की तरह वर्षों से पनपे भ्रष्टाचार और घूसखोरी की परतें

गणेश ‘पथिक’
कार्यकारी संपादक/विशेष संवाददाता
फ्रंट न्यूज नेटवर्क समूह, बरेली। चौधरी छत्रपाल सिंह…एक ऐसा नाम, जिसका पिछले कई दशकों से सिर्फ मीरगंज इलाके या बरेली जनपद में ही नहीं, बल्कि समूचे रुहेलखंड क्षेत्र में गन्ना-सहकारिता की सच्ची-खरी राजनीति में एकछत्र राज कायम रहा है। विभागीय अधिकारिर्यों-कर्मचारियों की घूसखोरी-कमीशनबाजी और भ्रष्टाचार के हर पैंतरे के खिलाफ और किसानों के हक की लड़ाई के वास्ते पूरे दमखम और पूरी ईमानदारी से बड़ी लड़ाई लड़ते ही रहे हैं।

कृषकों का शोषण करने वाले गन्ना माफियाओं के खिलाफ कृषक संघर्ष समिति के विरोध प्रदर्शन में

दबे-कुचले, शोषित-पीड़ित काश्तकारों के साथ और गन्ना नाफियाओं, भ्रष्ट-कमीशनखोर अफसरों-मातहतों के खिलाफ हर मोर्चे पर डटकर खड़े रहने की चौधरी छत्रपाल की आदत और उनका सहज-सरल मगर सच्चा-खरा मिज़ाज बाकी औरों की ज़मात से उन्हें बिल्कुल अलग-एकदम जुदा साबित करने के लिए काफी है। तभी तो सहकारी समितियों-सहकारी बैंकों से बगैर भेदभाव लाभान्वित होते रहे इलाके के अधिकांश किसान उन्हें अपना सच्चा हमदर्द, मसीहा मानते रहे हैं और प्यार से उन्हें रुहेलखंड इलाके की गन्ना-सहकारिता राजनीति का ‘भीष्म पितामह’ तक पुकारने में कतई संकोच या गुरेज़ नहीं करते हैं।

चौधरी छत्रपाल सिंह

इसी 31 जनवरी को जीवन के 72वें वर्ष में प्रवेश कर रहे चौधरी छत्रपाल सिंह का जन्म मीरगंज विकास क्षेत्र के छोटे से गांव नरखेड़ा में 31 जनवरी 1954 को स्व. मोहन सिंह के पुत्र के रूप में हुआ था। लेकिन ससुराल के गांव नगरिया कल्याणपुर में खेती की काफी निजी जमीन और स्थायी आवास भी होने की वजह से उनकी कर्मभूमि मीरगंज ही अधिक रही है।

सहकार भारती के 57वें स्थापना दिवस समारोह में जिलाध्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार और अन्य मचासीन अतिथियों के साथ स्मारिका का विमोचन करते हुए (फाइल फोटो)

चौधरी छत्रपाल वर्ष 1973 से लगातार सहकारिता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। अपनी ससुराल के और वर्तमान आवासीय गांव नगरिया कल्याणपुर में सामुदायिक लिकास भवन की बिल्डिंग में बगैर किराए के नौ साल तक गन्ना सोसाइटी कार्यालय संचालित कराने और इसी गांव में परिषदीय प्राथमिक विद्यालय बनवाने के लिए भी उन्हें लंबा संघर्ष करने के साथ ही अपना राजनीतिक-प्रशासनिक कौशल भी प्रदर्शित करना पड़ा था। वर्ष 1988 में चौधरी छत्रपाल ने पहली बार जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) बरेली के मीरगंज निर्वाचन क्षेत्र से संचालक (डायरेक्टर) का चुनाव लड़ा लेकिन  मौजूदा मीरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष मुन्ना बाबू के सगे बड़े भाई स्व. प्रणवीर गुप्ता से मात्र दो वोटों के अंतर से हार गए थे लेकिन उन्होंने किसानों की बेहतरी के लिए लड़ने के अपने जिद-जुनून को छोड़ा नहीं और सहकारिता के माध्यम से गरीब-जरूरतमंद-किसान के हकूक की लड़ाई लगातार लड़ते ही रहे।

वर्ष 1996 में डॉ. सूर्य प्रताप सिंह जिलाधिकारी बरेली, डीसीओ, मिल के यूनिट हेड, चौधरी लखन सिंह, राम भरोसे लाल और चौधरी छत्रपाल सिंह के साथ गन्ना सोसाइटी मीरगंज का निरीक्षण करते हुए।
वर्ष 1994 में नगरिया कल्याणपुर में नवनिर्मित प्राथमिक विद्यालय का उद्घाटन करते एमएलसी जयदीप सिंह बराड़़, साथ में तत्कालीन एसडीएम खेम सिंह खड़ग, चौधरी छत्रपाल सिंह और अन्य
ग्राम नगरिया कल्याणपुर में सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज की  बैठक को संबोधित करते हुए चौ. छत्रपाल सिंह, साथ में एमएलसी श्री जयदीप सिंह बराड़ एवं ग्राम प्रधान मंगली राम
नवगठित सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज के उद्घाटन के अवसर पर तत्कालीन गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश डॉ. ओमप्रकाश  और सदस्य विधान परिषद श्री जयदीप सिंह बराड़ का स्वागत करते एवं सभा को संबोधित करते हुए संस्थापक उपाध्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह

आखिरकार, इसका फल भी उन्हें वर्ष 1998 में उस वक्त मिला जब मीरगंज निर्वाचन क्षेत्र से ही डीसीबी डायरेक्टर (संचालक) का चुनाव उन्होंने दुबारा लड़ा और इस बार क्षेत्रीय किसानों के भरपूर समर्थन की बदौलत उन्होंने निर्विरोध जीत भी दर्ज की। बाद में वर्ष 2001 में अगले कार्यकाल के लिए भी चौधरी छत्रपाल को ही मीरगंज क्षेत्र से निर्विरोध डीसीबी संचालक (डायरेक्टर) चुना गया। उसी साल जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) के सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष भी निर्वाचित हुए।

चौधरी छत्रपाल सिंह का माल्यार्पण करते हुए (फाइल फोटो)

इसके बाद चौधरी छत्रपाल वर्ष 2018 तक लगातार पांच बार मीरगंज क्षेत्र से डीसीबी के निर्विरोध संचालक (डायरेक्टर) और लगातार दो कार्यकाल तक निर्विरोध उपाध्यक्ष भी रहे। चौधरी छत्रपाल सिंह वर्ष 2016 से 2018 तक जिला सहकारी बैंक बरेली के निर्विरोध चेयरमैन भी रह चुके हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, चौधरी छत्रपाल मीरगंज क्षेत्र की दस में से पांच सहकारी समितियों को नियंत्रित और संचालित करने वाले सहकारी संघ मुगलपुर (मीरगंज) के अध्यक्ष पद पर भी वर्ष 1992 से 2016 यानी 24 साल तक लगातार निर्विरोध चुने जाते रहे हैं।

सहकार भारती के प्रमुख पदाधिकारियों ते साथ जिलाध़्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह

सिर्फ इतना ही नहीं, मीरगंज क्षेत्र की पांच अन्य सहकारी समितियों को संचालित और नियंत्रित करने वाले सहकारी संघ मीरगंज के अध्यक्ष पद पर चौधरी छत्रपाल के सगे छोटे भाई चौधरी नेपाल सिंह की पत्नी शकुंतला देवी तीन वर्ष के एक कार्यकाल में और उनके भतीजे चौधरी सुमित सिंह पांच वर्ष के एक कार्यकाल में सर्वसम्मति से काबिज रहे हैं।

बरेली सांसद का स्वागत करते हुए सहकार भारती जिलाध्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह (फाइल फोटो)

चौधरी छत्रपाल सिंह सहकारिता आंदोलन के साथ ही गन्ना विकास के जरिए इलाके के गन्ना किसानों की लड़ाई भी उनके कंधे से कंधा मिलाकर दशकों से समानांतर रूप से बगैर डरे-बगैर थके लड़ते ही रहे हैं। पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार और चौधरी छत्रपाल सिंह समेत इलाके के कई किसान नेताओं के कई साल के लगातार संघर्ष और तगड़ी पैरवी की बदौलत जनवरी 1995 में मीरगंज में सिंधौली-हल्दी कलां रोड पर जेके उद्योग समूह की चीनी मिल की स्थापना हुई और इसके साथ ही सहकारी गन्ना विकास समिति बरेली को विभाजित कर नई सहकारी गन्ना विकास समिति (गन्ना सोसाइटी) मीरगंज गठित की गई। इससे पहले जेके शुगर मिल की स्थापना के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर लगाताछत्रपाल पैरवी करने, लखनऊ-दिल्ली तक कई बार दौड़ लगाने और फैक्ट्री के लिए जमीन चिह्नित कर उसे खरीदवाने तक के भगीरथ प्रयासों में भी चौधरी छत्रपाल और अन्य क्षेत्रीय किसान नेताओं का निश्चित ही अविस्मरणीय योगदान रहा है।

5 दिसंबर 2016 को जिला सहकारी बैंक बरेली का निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित होने पर समर्थकों ने फूलमालाओं से लाद दिया (फाइल फोटो)

वर्ष 2004 में चीनी मिल की दक्षिणी दिशा में नगरिया सादात गांव के पास स्थायी भवन का निर्माण होने तक लगातार नौ वर्ष तक सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज का कार्यालय अस्थायी रूप से पास के नगरिया कल्याणपुर गांव के सामुदायिक विकास केंद्र की इमारत में ही चलता रहा था। वर्ष 1995 में मीरगंज में जेके शुगर की स्थापना के बाद उसी साल सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज के गठन के बाद से वर्ष 2015 तक चौधरी छत्रपाल लगातार संचालक/उपाध्यक्ष पद पर भी निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं।

रामचंद्र गन्ना सोसाइटी मीरगंज के संस्थापक सदस्य एवं अध्यक्ष मुगलपुर साधन सहकारी समिति

भ्रष्ट अफसरों, कर्मियों, नेताओं ने डुबोईं बरेली की सहकारी संस्थाएं, मैंने हमेशा की मुखालफत

सहकारिता आंदोलन और गन्ना राजनीति के रुहेलखंड क्षेत्र के भीष्म पितामह के रूप में प्रतिष्ठित चौधरी छत्रपाल बताते हैं “यह सही है कि प्रदेश के साथ ही बरेली के जिला सहकारी बैंक और सहकारी समितियों को भी घूसखोरी और भ्रटाचार का घुन खोखला करता रहा है लेकिन बरेली की सहकारी संस्थाओं को डुबोने में पूर्वांचल के सहकारिता के चंद भ्रष्ट अधिकारियों, कुछ कमीशनखोर सहकारी सचिवों-कर्मचारियों के साथ ही कुछ भ्रष्ट स्थानीय नेताओं का बेशक बड़ा रोल रहा है। हमने अपने पूरे जीवन में अपनी पूरी ताकत से इस सरकारी तंत्र-नेतानगरी के भ्रष्टाचार का डटकर विरोध किया है और किसानों का हक मारने की इस नाइंसाफी के खिलाफ वर्षों से बराबर लड़ाई लड़ता ही रहा हूं।

वर्ष 2016 में जिला सहकारी बैंक बरेली में अपने कार्यालय में बैठे तत्कालीन चेयरमैन चौधरी छत्रपाल सिंह (फाइल फोटो)

सहकारिता, गन्ना विकास आंदोलम को बढ़ाने में इन किसान नेताओं का भी रहा है यादगार योगदान

वरिष्ठ किसान नेता, ‘बरेली के जलपुरुष’, पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार
स्व. श्री राम भरोसे लाल पूर्व ब्लॉक प्रमुख मीरगंज एवं वर्ष 1995 में गठित सरकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज की प्रबंध कमेटी के सदस्य
योगेंद्र कुमार गुप्ता उर्फ मुन्ना बाबू सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज के पूर्व उपाध्यक्ष, वर्तमान में मीरगंज के नगर पंचायत अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता
चौधरी बलवंत सिंह-(हुरहुरी), गन्ना सोसाइटी मीरगंज के संसंथापक सदस्य, सेवानिवृत्त अध्यापक-राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज मीरगंज
चौधरी अभय सिंह गन्ना सोसाइटी के संस्थापक सदस्य एवं अध्यक्ष आनंदपुर साधन सहकारी समिति
स्व.चौधरी प्रेमपाल सिंह डायरेक्टर गन्ना सोसाइटी बरेली एवं ग्राम प्रधान तथा अध्यक्ष गहबरा साधन सहकारी समिति एवं सहकारी गन्ना समिति मीरगंज के संस्थापक सदस्य

चौधरी छत्रपाल सिंह बताते हैं-“गरीब, जरूरतमंद, शोषित किसान की मेरी इस लड़ाई और शुगर मिल, सहकारी गन्ना विकास समिति मीरगंज की स्थापना में पूर्व विधायक-किसान नेता 87 वर्षीय जयदीप सिंह बरार, उपाध्यक्ष रहे मौजूदा मीरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष योगेंद्र कुमार गुप्ता उर्फ मुन्ना बाबू, पूर्व ब्लॉक प्रमुख मीरगंज स्व. रामभरोसेलाल (असदनगर), स्व. पं. लक्ष्मण स्वरूप (नगरिया सादात), मीरगंज गन्ना सोसाइटी की स्थापना में सहयोगी रहे बरेली सोसाइटी के तत्कालीन डायरेक्टर और गहवरा प्रधान तथा सहकारी समिति गहवरा के सभापति रह चुके स्व. चौधरी प्रेमपाल सिंह,रामचंद्र गन्ना सोसाइटी मीरगंज के संस्थापक सदस्य एवं अध्यक्ष मुगलपुर साधन सहकारी समिति रामचंद्र, स्व. लाखन सिंह (भैरपुरा) के साथ ही चौधरी हरपाल सिंह परौरा और चौधरी बलवंत सिंह-हुरहुरी (दोनों अभी भी इस लड़ाई में हमारे सहयोगी हैं) का भी निश्चित ही बहुत बड़ा और अविस्मरणीय योगदान रहा है।”

वर्ष 2001 में डीसीबी की एजीएम में बोलते बैंक डायरेक्टर/अध्यक्ष  रिठौरा नगर पंचायत अशोक कुमार गुप्ता और मंचासीन बैंक के उपाध्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह,  अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गंगवार, एआर (कोऑपरेटिव) तथा डिप्टी रजिस्ट्रार (कोऑपरेटिव) बरेली मंडल

‘छमाही’ वसूली के ‘दस्तूर’ ने सहकारी समितियों को बनाया डिफॉल्टर, डीसीबी का भी बैठाया भट्ठा

एक सवाल पर सहकार भारती बरेली के मौजूदा जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश गन्ना संघ के प्रतिनिधि और तीन साल तक जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) बरेली के चेयरमैन रह चुके चौधरी छत्रपाल सिंह ने सहकारी समितियों की दयनीय हालत की असल वजह का खुलासा करते हुए बताया-“बेहद गंदी और कड़वी सच्चाई यही है कि अक्सर एक से दो साल तक पगार तक के लिए भी तरसने-भटकने वाले अल्पवेतन भोगी सहकारी समितियों के सचिवों को नौकरी बचाने की खातिर विभागीय अधिकारियों को ‘छमाही’ भी देनी ही पड़ती रही है। अब यह बात अलग है कि मजबूरी और जबर्दस्ती के इस ‘दस्तूर’ को निभाने के लिए ये बेचारे सचिव अपनी समिति की तहबील या रोकड़ में से ही निकालकर अफसरों को भेंट-पूजा चढ़ाते रहे हैं। यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि गांवों की इन सहकारी समितियों (पैक्स) की अमूमन अपनी अंशपूंजी नहीं होती है। वे तो जिला सहकारी बैंक से मिले धन को ही किसानों को फसली ऋण के तौर पर बांटती हैं और काश्तकारों से कर्ज की वसूली कर रकम को डीसीबी को वापस कर देती हैं।”

वर्ष 2001 में डीसीबी की एजीएम को संबोधित करते जीएम मेवाराम गंगवार और मंचासीन (बाएं से) , एआर (कोऑपरेटिव), डिप्टी रजिस्ट्रार (कोऑपरेटिव) बरेली मंडल, अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गंगवार और उपाध्यक्ष चौ. छत्रपाल सिंह

बकौल छत्रपाल, “इसी आपाधापी और भ्रष्टाचार की वजह से गांवों की सहकारी समितियां (पैक्स) और उन्हें वित्तीय सहयोग करने वाले डीसीबी अक्सर कर्ज के अझेल और कभी उतर नहीं पाने वाले बोझ तले डूबते ही रहे हैं। पूर्वांचल के ज्यादातर जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) तो अकेले इसी कारण से डूब भी चुके हैं। उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में 90 फीसदी सहकारी समितियां जिला सहकारी बैंकों की डिफॉल्टर बकाएदारों की श्रेणी में फंस चुकी हैं। इसके अलावा भी सहकारिता विभाग, डीसीबी और सहकारी संघों, समितियों में ढेर सारी अनियमितताएं हैं। सहकार भारती के बरेली जिलाध्यक्ष की हैसियत से मेरी हरचंद और ईमानदार कोशिश सहकारी संघों, समितियों, डीसीबी और सहकारिता विभाग को आपाधापी, भ्रष्टाचार और घूसखोरी-कमीशनखोरी की दलदल से बाहर निकालकर इन सबको किसान, गरीब, महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए कल्याणकारी और इनकी कार्यशैली को पूर्णत: भ्रष्टाचारमुक्त, पारदर्शी बनाने की ही रहेगी।”

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह

उम्मीद: पीएम मोदी-अमित शाह के पैने मार्गदर्शन में सहकारी समितियों का भविष्य है उज्ज्वल

बातों के दरम्यान डीसीबी के एक्स प्रेसिडेंट और सहकार भारती को वर्तमान जिलाध्यक्ष चौधरी छत्रपाल की आंखों से उम्मीद की किरणें फूटती भी साफ दिख जाती हैं। बताते हैं-“केंद्र में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय का गठन होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैबिनेट मंत्री अमित शाह के पैने नेतृत्व और मार्गदर्शन में गांवों से कस्बों, छोटे शहरों और महानगरों तथा दिल्ली, चेन्नई, मुम्बई, बंगलुरु जैसे कॉस्मोपॉलिटन शहरों तक देश भर में सहकारी समितियों को डिजिटल, ऑनलाइन, पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त और ग्राहकों के लिए पूर्णतः जवाबदेह बनाने की कोशिशें युद्धस्तर पर की जा रही हैं। सहकारी समितियों से जुड़ी अच्छी खबरें आने भी लगी हैं। जल्दी ही देश भर में सुखद नतीजे हम सबके सामने होंगे।”

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