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जांच में 21.52 करोड़ के घोटाले की पुष्टि, 13 अफसर और दो कार्यदायी एजेंसियां दोषी करार

बरेली-सितारगंज फोरलेन और रामगंगा- रामपुर हाईवे रिंग रोड भूमि अधिग्रहण प्रकरण

सीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी ने डीएम को सौंपी 227 पेज की रिपोर्ट

15 में से 9 केसों में पकड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा, इनमें छह नवाबगंज और तीन सदर तहसील के

विशेषज्ञों की कमेटी से जांच कराने और दोषियों पर विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश

एफएनएन ब्यूरो, बरेली। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और रामपुर हाईवे-रामगंगा रिंग रोड के भूमि अधिग्रहण में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने 13 तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी माना है और इन सभी के खिलाफ शासन से सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की है। डीएम के आदेश पर गठित इस जांच कमेटी ने 15 बड़े मामलों में से नौ में फर्जीवाड़ा पकड़ा है। छानबीन में 21.52 करोड़ रुपये से ज्यादा का मूल्यांकन कर सरकार को आर्थिक चोट पहुंचाने की भी तस्दीक हुई है।

बरेली के जिन नौ मामलों में धांधली सामने आई है, उनमें छह नवाबगंज और तीन सदर तहसील के हैं। गड़बड़ियों और राजस्व क्षति के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा सर्वे और मूल्यांकन के लिए नामित एजेंसी साईं सिस्ट्रा ग्रुप और एसए इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूर्ण रूप से दोषी माना गया है।

जांच कमेटी ने माना कि इन्होंने स्थानीय स्तर पर किसानों से सांठगांठ कर राजस्व को करोड़ों की क्षति पहुंचाई। लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अभियंताओं ने भी सत्यापन में लापरवाही बरती। लिहाजा उन्हें भी दोषी करार दिया गया है।

जांच कमेटी के अध्यक्ष सीडीओ जगप्रवेश ने दस दिन में जांच पूरी कर 227 पेज की रिपोर्ट डीएम रविंद्र कुमार को सौंप दी है। कमेटी ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच विशेषज्ञ समिति से कराने की भी संस्तुति की है, ताकि राजस्व हानि का और भी सटीक आकलन किया जा सके। विशेषज्ञ समिति में राजस्व विभाग, एनएचएआई के विशेषज्ञों और तकनीकी अफसरों को शामिल करने का आग्रह किया गया है।

जांच कमेटी की सिफारिश-सबको दिए जाएंं ‘कारण बताओ’ नोटिस

कमेटी ने नियमविरुद्ध भू उपयोग परिवर्तन कर करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों और कंपनियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने और पक्ष सुनकर उत्तरदायित्व निर्धारित करने की शासन से सिफारिश की है।

कमेटी ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि घोटाले में अधिक मुआवजा (प्रतिकर) प्राप्त करने के लिए अधिकारियों के साथ षड़यंत्र करके कृषि भूमि का अकृषित में भू उपयोग परिवर्तन कराने और उस पर परिसंपत्तियां दर्शाकर अधिक मूल्यांकन कराने वाले आवेदक/भूस्वामी के खिलाफ भी सुसंगत धाराओं में विधिक कार्यवाही करना न्यायसंगत होगा।

पूरे प्रकरण में शिथिलता, लापरवाही बरतने और कायदे से परीक्षण नहीं करने के दोषी तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, बरेली आशीष कुमार और तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी बरेली मदन कुमार के विरुद्ध भी उचित कार्यवाही की संस्तुति की है। इन दोनों अफसरों के अलावा एसएलएओ कार्यालय के अमीन डम्बर सिंह, नवाबगंज तहसील के लेखपाल सुरेश सक्सेना, सदर तहसील के लेखपाल उमाशंकर, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता नारायण सिंह (अब सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह, अमीन शिवशंकर, एनएचएआई के साइट इंजीनियर और इंजीनियर रविंद्र गंगवार (वैल्यूअर) को भी कायदे से परीक्षण नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना है।

“शासन को भेज दी है जांच रिपोर्ट
एनएचएआई और रिंग रोड प्रकरण की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वहां से जो दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनका अनुपालन कराया जाएगा। -रविंद्र कुमार-जिलाधिकारी, बरेली

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