- मोदी का नाम जप रहे भाजपा के दावेदारों के लिए मुसीबत बन सकते हैं पूर्व विधायक
- जनता के बीच आज भी बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं ठुकराल
कंचन वर्मा, रुद्रपुर : नगर निकाय चुनाव में रुद्रपुर मेयर सीट पर आरक्षण का पिटारा भले ही भविष्य के गर्भ में है, लेकिन अगर यह सीट सामान्य हुई तो भाजपा के लिए राह कठिन होगी। सत्ताधारी पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल बनेंगे, हालांकि अभी तक चर्चा उनके छोटे भाई संजय ठुकराल के मैदान में उतरने की है लेकिन माना जा रहा है कि राजकुमार ठुकराल ही सिरमौर बनेंगे। बड़े भाई के लिए फिलहाल संजय ठुकराल अपनी राजनीतिक बलि देंगे। दरअसल कांग्रेस को भी इस सीट पर एक मजबूत प्रत्याशी की जरूरत है, ऐसे में ठुकराल पार्टी का चेहरा बन सकते हैं।
दो बार के विधायक राजकुमार ठुकराल को भले ही भाजपा ने दुत्कार दिया हो, लेकिन राजनीति के मैदान में उनको चौके-छक्के लगाते देखा जा सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद ठुकराल भाजपा प्रत्याशी शिव अरोरा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़े और 27000 मत पाए।
जनता के बीच आज भी वह एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में उनकी वापसी की कोशिशो को झटका लगा। यहाँ तक की उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले उनके करीबियों ने भी दूरी बना ली। अब क्योंकि निकाय चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में राजकुमार ठुकराल के लिए यह बड़ा मौका भी है।
रुद्रपुर मेयर सीट अगर सामान्य हुई तो ठुकराल का चुनावी मैदान में उतरना तय है। हालांकि अभी तक चर्चा उनके छोटे भाई संजय ठुकराल के चुनाव लड़ने की है लेकिन माना जा रहा है कि बड़े भाई राजकुमार ठुकराल के लिए संजय अपनी राजनीतिक बलि दे सकते हैं।
युवाओं में संजय का बड़ा नेटवर्क है और यही नेटवर्क नगर निकाय चुनाव में ठुकराल के लिए धुरी बन सकता है। सोने पर सुहागा कांग्रेस, जिसे एक मजबूत प्रत्याशी की जरूरत है और राजकुमार ठुकराल को भी एक बड़े राजनीतिक प्लेटफार्म की, तो ऐसे में दोनों के लिए यह सुनहरा मौका भी है।
उधर, नाली और सड़क के मुद्दे पर होने वाले इन चुनाव में भी भाजपा का मोदी ही सहारा हैं। ग्रास रूट पर नजर दौड़ाएं तो कोई ऐसा प्रत्याशी नजर नहीं आता जो ठुकराल के मुकाबले मैदान में ताल ठोक सके। समीकरणों के लिहाज से भाजपा भले ही इस सीट को लेकर उत्साहित हो, लेकिन इतना तय है कि अगर सीट सामान्य हुई तो कांग्रेसी प्लेटफार्म पर राजकुमार ठुकराल से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि कोई राजनीतिक मंच न होने के बावजूद ठुकराल की सक्रियता लगातार बनी रही। वह लोगों के सुख-दुख में बराबर से शामिल होते देखे गए।
एंबुलेंस 108 के नाम से चर्चित उनके भाई संजय ठुकराल भी कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े रहे। विपरीत परिस्थितियों में भी जनता के बीच उनकी मौजूदगी ने लोगों के दिमाग से उनका नाम निकलने नहीं दिया। जबकि भाजपा के टिकट पर दावेदारी कर रहे लोग दूर-दूर तक नजर नहीं आए। अब जबकि चुनाव निकट है तो बरसाती मेंढक की तरह भाजपा में दावेदारों की लंबी लाइन नजर आ रही है। जनता किसे मौका देगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन ठुकराल बंधु नगर निकाय चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बनेंगे।
राजेश शुक्ला को चुनाव हराकर छात्र राजनीति से हुई थी ठुकराल की एंट्री
रुद्रपुर : वर्ष 1982 में एएन झा कॉलेज के चुनाव में सेक्रेटरी पद पर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को हराकर राजकुमार ठुकराल ने छात्र राजनीति में प्रवेश किया था। 1988 में वह कॉलेज के अध्यक्ष मनोनीत किए गए। इसके बाद वर्ष 1989 से 93 तक वह लगातार कॉलेज के अध्यक्ष चुने जाते रहे।
वर्ष 1989 में उन्होंने भगवानपुर की अंजू शाह को चुनाव हराया जबकि वर्ष 1990 में गिरीश भट्ट मामू, राजेश बत्रा नीटू और मोहम्मद रफीक को मात दी। इसके बाद ठुकराल में पलटकर नहीं देखा। भाजपा संगठन में वह सभी नौ प्रत्याशियों की जमानत जब्त कराकर प्रदेश पार्षद बने और फिर 1997 से 2002 तक मुख्य बाजार के पार्षद रहे। इस चुनाव में उन्होंने अध्यक्ष से भी ज्यादा मत हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सुशील बत्रा टीरी को मात दी।
2003 में कांग्रेस के टिकट पर 7500 वोटो से अविनाश बंगा को हराकर वह नगर पालिका रुद्रपुर के अध्यक्ष का चुनाव जीते। 2008 तक अध्यक्ष रहने के बाद उन्होंने 2012 में विधायक के लिए ताल ठोकी। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया। दो विधायको कांग्रेस से तिलक राज बेहड़ और बसपा के टिकट पर लड़ रहे प्रेमानंद महाजन से उनका सामना हुआ लेकिन ठुकराल ने जीत हासिल की।
वर्ष 2017 में उन्हें दोबारा मौका मिला और वह सबसे ज्यादा 69,000 वोटो के साथ भाजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। 2022 में उनका टिकट कटने के बाद वह निर्दलीय चुनाव लड़े और निर्दलीय ताल ठोकने वालों में प्रदेश में सर्वाधिक 27,000 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। अब ठुकराल का राजनीतिक भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
- सामान्य सीट हुई तो भाजपा से यह हैं दावेदार
भारत भूषण चुघ, अनिल चौहान, ललित मिगलानी, सुशील गावा, विकास शर्मा।







