03
Gemini_Generated_Image_yb399pyb399pyb39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 9.45.28 AM
previous arrow
next arrow
Shadow

कोरोना के प्रकोप से उबरे लोगों को खतरा, बढ़ रहे हैं मौत के मामले

Spread the love

एफएनएन, मुंबई : महाराष्ट्र में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सिंगल डिजिट तक पहुंचीं कोविड से होने वाली मौतें फिर डबल डिजिट हो गई हैं। कोरोना से ठीक हो चुके मरीज भी मौत का शिकार हो रहे हैं। जानकार बताते हैं कि इसकी एक अहम वजह लंबे कोविड के अलावा साइटोकाइन स्टॉर्म दिख रहा है। कोरोनावायरस के उपचार के बाद भी लोगों को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही वायरस के बदलते रूप से स्वास्थ्य मंत्रालय की चिंता भी स्वाभाविक है। अब महाराष्ट्र में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सिंगल डिजिट तक पहुंचीं कोविड से होने वाली मौतें फिर डबल डिजिट हो गई हैं। कोरोना से ठीक हो चुके मरीज भी मौत का शिकार हो रहे हैं। जानकार बताते हैं कि इसकी एक अहम वजह लंबे कोविड के अलावा साइटोकाइन स्टॉर्म दिख रहा है। इस वेव में इसका रूप बदला है। लोग रिकवर होने के बाद फिर से अस्पताल पहुंच रहे हैं या कोविड वॉर्ड से दोबारा ICU वॉर्ड में शिफ्ट किए जा रहे हैं। जानकार कहते हैं कि अस्पताल से छुट्टी के तीन महीने बाद तक सेल्फ मॉनिटरिंग करें। 82 साल के शांताराम पाटिल 15 दिन पहले कोविड पॉजिटिव हुए थे। वह लगभग ठीक हो चुके थे लेकिन साइटोकाइन स्टॉर्म के कारण बीते चार दिनों से ICU में हैं। निमोनिया और ब्लैक फंगस ने भी उन्हें जकड़ लिया है।

ये है साइटोकाइन स्टॉर्म
कोविड मरीजों का जब इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचाने लगता है। तब इस घातक रूप को साइटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं। कोरोना की दूसरी लहर में इसने भी रूप बदला है।

इस बीमारी में भी दिख रहा बदलाव
लायंज क्लब हॉस्पिटल के डॉक्टर सुहास देसाई ने कहा कि पहली वेव में ऐसा था कि गम्भीर मरीज साइटोकाइन स्टॉर्म फेज में ही अस्पताल आते थे, वे केस क्रिटिकल होते थे और रिकवर होने के बाद बीमारी के दोबारा लौटने का चांस नहीं रहता था। अब दिख रहा है की मरीज जब इंफेक्शन से सेटल होने लगता है, तब उस फेज में अचानक ब्रेथलेस होता है या फिर से हालत बिगड़ती है। ये पेशेंट पहले पॉजिटिव हुए थे, पर जब हमारे पास आए तो साइटोकाइन स्टॉर्म में थे। साथ ही मरीज को एक साइड फेशियल स्वेलिंग थी।
Wockhardt अस्पताल का कहना है कि इस बार कोविड से ठीक होकर ICU से नॉर्मल वॉर्ड में जाने वाले करीब 5 फीसदी मरीज फिर कुछ दिनों बाद ICU लाए गए। इनमें से 2 प्रतिशत मरीजों की मौत सम्भव है। अस्पताल के ICU डायरेक्टर डॉक्टर बिपिन जिभकाटे ने कहा कि बहुत सारे मरीज ICU से ठीक होकर कोविड वॉर्ड में शिफ्ट होते हैं। इनमें से हमने देखा है कि 3-5 फीसदी मरीजों में फिर सिम्प्टम बढ़ते हैं। उनको वापस ICU में भर्ती करना पड़ता है. 1-2 फीसदी मामलों में मौत भी हो जाती है। 40 प्रतिशत तक ऐसे मरीज हैं, जो लॉन्ग टर्म वेंटिलेटर पर हैं। यानी एक महीने से ऊपर उनको वेंटिलेटर पर हो गया है।

बढ़ा मौत का आंकड़ा
गौरतलब है कि 8 जून को सिंगल डिजिट 7 मौतों के बाद 9 जून को 27 और 10 जून को 22 मौतें मुंबई शहर ने देखीं। शहर के 70 फीसदी वेंटिलेटर और 60 फीसदी ICU बेड अभी भी फुल हैं। शहर में 1100 क्रिटिकल कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है। एक्स्पर्ट्स कहते हैं कि अस्पताल से छुट्टी के बाद करीब तीन महीने की सेल्फ मॉनिटरिंग जरूरी है। इस बीच कोई भी लक्षण नजरअंदाज न करें।

Hot this week

Haridwar जमीन घोटाले में कार्रवाई के बाद IAS कर्मेंद्र सिंह और PCS अजयवीर को मिली नई तैनाती

एफएनएन, देहरादून : Haridwar उत्तराखंड शासन ने दो अधिकारियों...

kalsi में बड़ा हादसा: 35 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, पांच पर्यटक गंभीर घायल

एफएनएन, देहरादून : kalsi उत्तराखंड के कालसी थाना क्षेत्र...

Topics

kalsi में बड़ा हादसा: 35 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, पांच पर्यटक गंभीर घायल

एफएनएन, देहरादून : kalsi उत्तराखंड के कालसी थाना क्षेत्र...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img