एफएनएन, देहरादून : Haridwar उत्तराखंड शासन ने दो अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें IAS अधिकारी कर्मेंद्र सिंह और PCS अधिकारी अजयवीर शामिल हैं। खास बात यह है कि दोनों अधिकारियों का नाम हरिद्वार के चर्चित जमीन घोटाला प्रकरण में सामने आया था और मामले में इनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी। अब शासन ने दोनों अधिकारियों का निलंबन वापस लेते हुए उन्हें नई तैनाती दे दी है।
कर्मेंद्र सिंह को महिला कल्याण विभाग की जिम्मेदारी
शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, IAS अधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपर सचिव, महिला कल्याण एवं बाल विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं PCS अधिकारी अजयवीर को डोईवाला स्थित गन्ना-चीनी मिल का अधिशासी अधिकारी नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारी लंबे समय से नई तैनाती का इंतजार कर रहे थे। हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच के दौरान दोनों को निलंबित किया गया था।
हरिद्वार जमीन घोटाले से जुड़ा है मामला
दरअसल, हरिद्वार में जमीन खरीद से जुड़े मामले में कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे थे। आरोप था कि निजी लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से जमीन के दाम बढ़ाए गए और इसके बाद नगर निगम की ओर से जमीन की खरीद की गई। बताया गया कि हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। इससे पहले जमीन का उपयोग कृषि से बदलकर व्यावसायिक किया गया, जिसके बाद उसकी कीमत में काफी बढ़ोतरी हो गई। इसके बाद नगर निगम द्वारा जमीन खरीदने को लेकर गंभीर सवाल उठे और पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
कई अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
जांच के दौरान इस मामले में IAS, PCS समेत विभागीय स्तर के कई अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई थी। कई अधिकारियों को निलंबित किया गया और मामले में अलग-अलग स्तर पर जांच कराई गई।
जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी। इसी मामले में तत्कालीन हरिद्वार नगर निगम नगर आयुक्त IAS वरुण चौधरी के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
निलंबन के बाद अब मिली तैनाती
हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया के बीच कर्मेंद्र सिंह और अजयवीर लंबे समय से नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे थे। अब शासन ने दोनों अधिकारियों का निलंबन वापस लेते हुए अलग-अलग विभागों में जिम्मेदारी सौंप दी है।
इन नई तैनातियों के बाद हरिद्वार जमीन घोटाले से जुड़े अधिकारियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।







