एफएनएन, देहरादून : Uttarakhand की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में चिकित्सकों के वेतन से जुड़ा बड़ा फैसला लिया। सरकार ने सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट और डिमॉन्स्ट्रेटर डॉक्टरों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात चिकित्सकों के वेतन में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ोतरी की गई है।
पर्वतीय क्षेत्रों में सीनियर रेजीडेंट को अब ₹1.10 लाख
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों का मासिक वेतन 90 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों में सीनियर रेजीडेंट का वेतन 84 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह किया गया है।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना और डॉक्टरों को पहाड़ों में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करना है।
जूनियर रेजीडेंट और डिमॉन्स्ट्रेटर का भी बढ़ा वेतन
कैबिनेट ने जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के मानदेय में भी इजाफा किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में जूनियर रेजीडेंट को अब 76 हजार रुपये के बजाय 85 हजार रुपये मासिक मिलेंगे। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में उनका वेतन 71 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है।
इसी तरह डिमॉन्स्ट्रेटर के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में डिमॉन्स्ट्रेटर को अब 76 हजार के स्थान पर 85 हजार रुपये, जबकि मैदानी क्षेत्रों में 71 हजार के बजाय 80 हजार रुपये मासिक वेतन मिलेगा।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने पर जोर
उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई महत्वपूर्ण विभागों में स्वीकृत पदों की तुलना में काफी कम डॉक्टर उपलब्ध हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि वेतन बढ़ोतरी से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की भर्ती और उन्हें लंबे समय तक सेवा में बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा पर्वतीय जिलों के अस्पतालों को मिलने की उम्मीद है, जहां चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को अक्सर इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है।







