एफएनएन, वाराणसी: Varanasi Dengue मानसूनी बारिश के बाद अब गंगा का जलस्तर भी धीरे-धीरे नीचे आने लगा है, लेकिन पानी उतरने के साथ मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वाराणसी में डेंगू के अब तक 40 आधिकारिक मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह आंकड़ा सरकारी अस्पतालों में हुई जांच पर आधारित है और इसमें निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के आंकड़े शामिल नहीं हैं।
बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू और मलेरिया को लेकर निगरानी बढ़ा दी है।
सितंबर-अक्टूबर में बढ़ते हैं डेंगू के मामले
सीएमओ डॉ. एनपी सिंह के मुताबिक, बारिश के बाद डेंगू के मामले बढ़ने लगते हैं और सितंबर-अक्टूबर इस बीमारी के लिहाज से पीक सीजन माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के आधार पर डेंगू के हॉटस्पॉट चिह्नित करता है।
इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी के साथ लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
डेंगू की जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सलाह
सीएमओ ने लोगों से डेंगू की जांच और इलाज को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि कई लोग निजी लैब में कार्ड टेस्ट कराने के बाद खुद ही डेंगू का इलाज शुरू कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू की पुष्टि के लिए निर्धारित सरकारी जांच केंद्रों में कराई गई जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वाराणसी में सरकारी अस्पतालों के अलावा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल समेत कुछ बड़े अस्पतालों में ELISA टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डेंगू की पुष्टि के लिए इस जांच का इस्तेमाल किया जाता है।
डेंगू के नाम पर वसूली की शिकायत करें
सीएमओ ने कहा कि यदि कोई अस्पताल या लैब डेंगू के नाम पर मरीजों को डराकर अनावश्यक पैसे वसूलने की कोशिश करता है तो इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पताल या लैब के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शहर और गांवों में बनाए गए हॉटस्पॉट
डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इन इलाकों में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के साथ-साथ लोगों को बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें ऐसे क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं और जरूरत के अनुसार एंटी लार्वा गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
डेंगू के साथ मलेरिया का भी खतरा
बारिश के बाद डेंगू के साथ मलेरिया का खतरा भी बढ़ गया है। जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। मलेरिया मादा एनॉफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना और कंपकंपी, अधिक पसीना आना, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और हल्का दस्त शामिल हो सकते हैं।
नगर निगम ने 335 टीमें लगाईं
मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए वाराणसी नगर निगम की ओर से भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, शहर के 100 वार्डों में सफाई और मच्छर नियंत्रण के लिए अभियान जारी है।
इसके लिए कुल 335 टीमें लगाई गई हैं। शनिवार और रविवार को विशेष सफाई अभियान के साथ हैंड फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा गाड़ियों पर लगी करीब 10 बड़ी मशीनों से शहर और विभिन्न कॉलोनियों में फॉगिंग कराई जा रही है।
खाली प्लॉट और जलभराव वाले क्षेत्रों पर नजर
नगर निगम की ओर से खाली प्लॉटों पर भी विशेष निगरानी की जा रही है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खाली प्लॉटों में पानी जमा होने के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है।
इन स्थानों पर एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है। नगर निगम इसके लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कोविड काल में उपलब्ध कराए गए इन ड्रोन के जरिए बड़े और खुले क्षेत्रों में दवा का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित किया जा सके।








