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इलेक्ट्रिक स्पार्किंग के बाद चार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स फटने से भड़की आग में जलकर मरे थे 11 नवजात

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झांसी मेडिकल कालेज अग्निकांड: मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में स्टाफ की लापरवाही और आपराधिक कृत्य की आशंका से इनकार

एफएनएन ब्यूरो‌, झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एसएनसीयू) में शुक्रवार रात हुए भीषण अग्निकांड की जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने शासन को भेज दी है। जांच में आपराधिक कृत्य या स्टाफ की लापरवाही सामने नहीं आई है। अग्निकांड की वजह प्लग से हुई स्पार्किंग के बाद चार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स फटना बताई गई है। मंडलायुक्त ने जांच के दौरान हादसे के वक्त वार्ड में मौजूद आठ चिकित्सा कर्मियों और भर्ती नवजातों के 10 परिजनों के बयान लिए हैं।

आग के दौरान बचाए गए एक नवजात ने रविवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अब मरने वाले नवजातों का आंकड़ा 11 पहुंच गया है। हालांकि डॉक्टरों ने सफाई दी है कि नवजात की मृत्यु आग में जलने से नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी से हुई है।

शासन की ओर से मृत व घायल नवजातों के परिजन को सहायता राशि भी उपलब्ध करा दी गई है। छह दंपतियों को उनके नवजात सकुशल सौंप दिए गए। बाकी 31 बच्चों का इलाज चल रहा है। बतीते चलें कि शुक्रवार देर रात मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में भीषण अग्निकांड में 10 नवजात शिशुओं की जलकर मृत्यु हो गई थी जबकि अग्निशमन विभाग और सेना की दमकलों से वार्ड के खिड़की-दरवाजे तोड़कर अन्य शिशुओं को बचाकर दूसरी जगह भर्ती कराया गया था। रविवार को उपचार के दौरान बांदा के अलीगंज निवासी लक्ष्मी पत्नी भोला के नवजात की मौत हो गई।

आज लखनऊ से जांच को आएगी उच्चस्तरीय टीम

शासन स्तर पर चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक किंजल सिंह की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय टीम आज सोमवार को यहां पहुंचकर जांच करेगी। इसे सात दिन में रिपोर्ट देनी है। टीम में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, अपर निदेशक विद्युत एवं अग्निशमन महानिदेशक की ओर से नामित अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी आग लगने के कारणों और लापरवाही की पहचान करेगी। साथ ही भविष्य में ऐसे हादसे की पुनरावृत्ति नहीं होने देने के लिए बचाव के जरूरी उपा़यों की सिफारिश भी करेगी।

गुम नहीं हुए, 49 नवजात ही भर्ती थे
अग्निकांड के दरम्यान वार्ड में भर्ती 49 बच्चों की प्रशासन ने सूची जारी कर दी है। इनमें से 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। जबकि, 6 बच्चे परिजन को सौंप दिए गए हैं, बाकी 32 नवजात का इलाज जारी है। गुम हुए बच्चों की वजह से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। रविवार को आखिरी गुम हुए बच्चे को उसकी मां को सौंपने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। हादसे के तुरंत बाद मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या 55 बताई गई थी। लेकिन, बाद में प्रशासन ने बच्चों की संख्या 49 गिनाई थी। इससे माना जा रहा था कि हादसे के दरम्यान मची अफरातफरी में छह बच्चे गुम हो गए।

हालांकि जांच में साफ हो गया कि गुम बताए जा रहे बच्चे भी उन्हीं 49 नवजातों में शामिल थे, जो हादसे के दरम्यान वार्ड में भर्ती थे। खोजबीन हुई तो पता लगा कि एक बच्चे को ललितपुर के दंपती अपना समझकर ले गए थे, जबकि उनके बच्चे की हादसे में मौत हो गई थी। महोबा के एक दंपती का बच्चा झांसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। जबकि झांसी के कृपाराम की पत्नी शांति के झुलसे बच्चे का महोबा के भोलाराम की पत्नी लक्ष्मी अपना बच्चा समझकर एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही है। लक्ष्मी के बच्चे का मेडिकल कॉलेज में ही इलाज चल रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि हमीरपुर के याकूब की पत्नी नजमा की दो बेटियों की हादसे में मौत हो गई थी लेकिन दंपती को तत्काल इसकी सूचना  नहीं दी गई थी। लिहाजा वे दोनों बच्चियों को गुम मान रहे थे। पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चियों के शव परिजनों को सौंप दिए गए।

डीएम भी बोले-49 बच्चे ही भर्ती थे

जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने भी साफ किया है कि हादसे के दरम्यान वार्ड में 49 बच्चे ही भर्ती थे। 10 बच्चों की आग में जलकर मौत हो गई थी। रविवार को इलाज के दौरान जिस बच्चे की मृत्यु हुई, वह आग में झुलसा नहीं था। फिर भी शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि मृत नवजात प्रिमेच्योर था। करीब एक किलो वजन का यह बच्चा आग से नहीं झुलसा था। वह बर्थ एस्फिक्सिया बीमारी की वजह से मरा है।

हादसे के वक्त इनके बच्चे थे वार्ड में भर्ती

नजमा-याकूब, हमीरपुर (दो बेटियां)
लक्ष्मी-भोला, महोबा
भागवती-धर्मेंद्र, ललितपुर
पूजा-भगवान सिंह, ललितपुर
पूनम-नेतराम, झांसी
संध्या-कंचन, झांसी
संजना-सोनू, ललितपुर
संतोषी-संतराम, जालौन
अभिलाषा-सुनील, झांसी
कविता-बालकिशन, झांसी
एकता-राहुल, झांसी
जामवती-दीपू, झांसी
कमलेश-मलखान, महोबा
पावर्ती-सोनू, हमीरपुर
रीना-राजकुमार, महोवा
विनीता-भागीरथ, टीकमगढ़
आरती-किशन, महोबा
दीपा-रहीश, ललितपुर
हेमवती-रामजनी, ललितपुर
काजल-बॉबी
मुस्कान-विशाल, जालौन
फूलबाई-नीरज, ललितपुर
पूजा-कृष्णकांत, मऊरानीपुर
पूनम-रंजीत, ललितपुर
राधा-प्रीतम, ललितपुर
शिवानी-मुकुल, निवाड़ी
सुरक्षा-विक्की, झांसी
साधना-नरेंद्र, झांसी
नेहा-नीरज, ललितपुर
नीलू-अरविंद, झांसी
दुर्गेश-राघवेंद्र, वसई
मोनिका-राजकुमार, निवाड़ी
निधि यादव-कपिल यादव, झांसी
रिया-गौरव, टीकमगढ़
भारती-अनिल, झांस्से
पिंकी-मुन्नालाल, ललितपुर
रजनी-अनुज, ललितपुर
शिफा-मंसूर, झांसी
सोनम-रोहित, झांसी
पूनम-मोनू, शिवपुरी
नैसी-प्रदीप, झांसी
नीलू-कुलदीप, कबरई
शांति-कृपाराम, शांसी
सुखवती-वरदानी, हमीरपुर
नेहा-रामरतन, झांसी
राधा-तेज, ललितपुर
रिकी-रविकुमार पाल, निवाड़ी

27 झुलसे बच्चों का चल रहा उपचार

18 झुलसे बच्चों का मेडिकल कॉलेज में इजाज चल रहा है। सात बच्चों का नर्सिंग होम में, एक बच्चे का जिला अस्पताल एवं एक बच्चे का मऊरानीपुर में उपचार कराया जा रहा है।”-डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी

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