Tuesday, February 10, 2026
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Homeराज्यउत्तर प्रदेश"हम जुर्मे मुहब्बत की सजा काट रहे हैं...!"

“हम जुर्मे मुहब्बत की सजा काट रहे हैं…!”

रामपुर में अखिल भारतीय काव्यधारा के तत्वावधान में यादगार कवि सम्मेलन, शब्द शिल्पी और काव्य शिल्पी सम्मान से नवाजे गए बरेली, रामपुर उत्तराखंड के कई वरिष्ठ कलमकार

पूनम गंगवार बरेलवी के सुरीले सुरों से रीझे आयोजकों ने उन्हें पहनाई मां शारदे की कंठी माला

फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। पड़ोसी रामपुर के मोहल्ला ज्वालानगर स्थित आनंद कॉन्वेंट स्कूल में साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय काव्यधारा के तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में बरेली की पूनम गंगवार ‘पुष्पा’ और यहीं के डॉ. महेश ‘मधुकर’, रामपुर के जितेंद्र कमल आनंद, शिवकुमार ‘चंदन’, डॉ. गीता मिश्रा ‘गीत’, शशि त्यागी समेत कई वरिष्ठ काव्यकारों को शब्द शिल्पी सम्मान और काव्य शिल्पी सम्मान से विभूषित किया गया।

समारोह का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा वागेश्श्वरी मां सरस्वती के चित्र पर दीप जलाकर और पुष्पार्चन कर किया गया। पूनम गंगवार ‘पुष्पा’ ने सुरीले सुरों में वाणी वन्दना सुनाई जिस पर पूरा सदन भक्तिभाव और आनंद के सागर में डूबता-उतराता रहा। पूनम गंगवार ‘पुष्पा’ की यह ग़ज़ल भी खूब सराही गई-“हम जुर्मे मुहब्बत की सजा काट रहे हैं, उस बेवफा पर कोई भी इल्ज़ाम नहीं है।”

आयोजक रामकिशोर वर्मा की ओर से पूनम गंगवार को उनके उत्कृष्ट शब्द चयन, अनुपम भावोद्गार और सुरीले गायन के लिए स्मृति चिह्न, शब्द शिल्पी सम्मान प्रदान कर और मोतियों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। सुभाषनगर बरेली के एक धर्मनिष्ठ परिवार में ब्याही पूनम रामलीला सभा महिला सभा सुभाषनगर और समृद्धि काव्य मंच की अध्यक्ष हैं। फतेहगंज पश्चिमी के गांव कुरतरा की बिटिया पूनम को उनके सराहनीय साहित्यिक-सामाजिक अवदान के लिए कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

कवि सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र कमल आनंद के दो और नीलम रानी सक्सेना के चार काव्य संग्रहों का विमोचन भी किया गया।

कवि सम्मेलन में जितेंद्र कमल आनंद ने अध्यात्म की यह रचना सुनाकर खूब वाहवाही और तालियां बटोरीं-नवचक्रों की बात हम- करते मूलाधार, मणिपुर के ऊपर ‘कमल’, स्वाधिष्ठानाधार।”

वरिष्ठ कवि रामकिशोर वर्मा ने भारत के स्वर्णिम अतीत और पतन के कारणों का कुछ इस अंदाज में बखान किया और सबकी प्रशंसा अर्जित की-“सोने की चिड़िया था भारत, वीरों की थी कमी न भाई, लाख हमारे वहां एक था, कहो गुलामी फिर क्यों आई?” नीलमरानी सक्सेना ने यह सरस गीत सुनाकर सदन को तालियों से गुंजायमान करवा दिया-चांदनी रात में अर्चना आपकी, चाहती हूं करूं वन्दना आपकी।”

कई घंटे तक चले इस यादगार कवि सम्मेलन में राजीव प्रखर, डॉ.अशफाक ज़ैदी, प्रीति अग्रवाल, पूनम दीक्षित, शिवकुमार शर्मा ‘चंदन’, अमित रामपुरी, हर्ष अमरोही, राजबाला धैर्य, रवि प्रकाश, सचिन सिंह, उदय प्रकाश सक्सेना, रश्मि चौधरी ‘दीक्षा’, आकर्ष सफर अमरोही, रजनी सिंह आदि कवि-कवयित्रियों ने भी अपनी सुमधुर रचनाओं से सबका मन मोह लिया और भरपूर तालियां-वाहवाही भी अपने नाम की। पीयूष प्रकाश सक्सेना, परमानंद प्रकाश सक्सेना, सुभाष चंद्र वर्मा, पुष्पा देवी, सात्विक चौधरी, दीपकमल जौहरी, अमन, नमन सक्सेना आदि काव्य प्रेमियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।

अध्यक्षता कर रहे जितेंद्र कमल आनंद ने सबका आभार जताया। संस्था के महासचिव रामकिशोर वर्मा ने अपने काव्यमय सफल संचालन से कवि सम्मेलन को ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अमूल्य सहयोग किया।

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