भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली में मंगलवार से "वैक्सीन और डायग्नोस्टिक्स के विकास के लिए जीनोम एडिटिंग टेक्नोलॉजी की उपयोगिता" विषय पर एक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में पहले दिन विशेषज्ञ वक्ताओं ने जीनोम एडिटिंग को पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में परिवर्तनकारी तकनीक बताया।
तकनीकी सत्रों के दौरान निदेशकों ने विभिन्न शोध बिन्दुओं जैसे बीमारी अलार्म सिस्टम, ब्रुसेल्ला ग्रसित पशुओं का प्रबन्धन, वैकल्पिक फीड एवं फोडर की पहचान, एनाप्लाज्मा के टीके का विकास, थर्मोस्टेबल टीके का विकास, कीटनाशक/खरपतवार नाशक दवाओं की विषाक्तता की पहचान के लिए फील्ड टेस्ट एवं पशुपालन में कृत्रिम बुद्धिमता का प्रयोग आदि विषयों पर शोध करने-कराने का भी आग्रह किया।