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झंझावाती वातावरण में शीतल-मंद पुरवइया का संजीवनी झोंंका है ‘काव्यामृत’ साहित्यिक पत्रिका

विकट प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझते हुए सात वर्ष से अपने दम पर निरंतर निकाल रहे चतुर्मासिक पत्रिका फ्रंट न्यूज नेटवर्क...

लघुकथाएं…जो सीधे दिल में उतरती हैं

इन्हें पढ़ने के बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो लेखकों ने बहुत नजदीक से इनकी समस्याओं को देखा हो। आजकल के इस दौर में भला इन पर कौन लिखना चाहता है? मैं इस लघुकथा संग्रह के सभी लेखकों को साधुवाद देता हूं, जिनकी लघुकथाएं सीधे दिल में उतरती हैं और एक चुभन छोड़ देती हैं।