Sunday, March 1, 2026
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‘साहित्य सुरभि’ की मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने बिखेरे होली के चटख रंग

फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। साहित्यिक संस्था “साहित्य सुरभि”की नियमित मासिक कवि गोष्ठी भोजीपुरा में हास्य कवि सरल कुमार सक्सेना के संयोजकत्व में उनके आवास/चाइल्ड पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई। गेंदा-गुलाब की पंखुड़ियां और गुलाल उड़ाते हुए कवियों ने अपने भाव सुमन प्रस्तुत किए।

गोष्ठी की अध्यक्षता रणधीर प्रसाद गौड़ ने की जबकि मुख्य अतिथि पी. के. दीवाना, विशिष्ट अतिथि रामकुमार भारद्वाज ‘अफरोज़’ एवं श्री डी.पी. निराला रहे। सरस्वती वंदना छंदकार रामकुमार कोली ने की। गोष्ठी का सरस संचालन मनोज दीक्षित ‘टिंकू’ द्वारा किया गया। गोष्ठी में होली गीत, होली के दोहे, होली में साली का स्थान जैसे विषयों की धूम रही। डॉ. राजेश शर्मा ‘ककरैली’ की गंभीर कविताओं का भी सभी ने रसास्वादन किया।

गोष्ठी में एक नए चेहरे ज़ाहिल कछलवी ने सुनाया-“जहां मंदिर-मंदिर शंख बजे, जहां मस्जिद के दीवान से, जहां ऊंचे कलश कलीसा के, जहां चर्चे नानक ईशा के, दरार नहीं पड़ने दूंगा, कोई रार नहीं चढ़ने दूंगा।” कविता की विशेषता बताते हुए संयेजक सरल कुमार सक्सेना ने पढ़ा-“कविता से अच्छा नहीं कोई जाम, कविता का ही नशा मुझे है तमाम”।

राजकुमार अग्रवाल ‘राज’ ने होली पर यह खूबसूरत ग़ज़ल सुनाई-“मोहब्बत का चढ़ा है रंग अबकी बार होली में, भरो सब प्यार से झोली करो इकरार होली में।” चौधरी अफसर खान ने कुछ यो फ़रमाया ” सुना है सरकार ने नया अभियान चलाया है तुम स्वास्थ्य-शिक्षा-रोटी की बात करते हो, वह एसआईआर लेकर आया है”। हास्य कवि पीके दीवाना ने भी होली की रचना पर वाहवाही बटोरी-“कैसी होली किसकी होली, किस संग खेलूं होली, वह तो और किसी की होली।”

अध्यक्ष श्री ‘धीर’ साहब ने आध्यात्मिक एवं रंगों से संबंधित गीतों के माध्यम से सभी को भाव-विभोर कर दिया। संस्था के अध्यक्ष रामकुमार कोली ने बसंत ऋतु प्रकृति पर”भंग हो समाधि अनंग की रति देखिए।” रामकुमार अफ़रोज़ ने हिंदी गजल के माध्यम से समां बांध दिया।

महासचिव डॉ. राजेश शर्मा ‘ककरैली’ ने होली पर दर्शन एवं रंग पर कुछ ऐसे कहा-“रंग-रंग में रंग गए, राधा संग भगवान। होली-होली श्याम की, रखे प्रेम का मान।” उपस्थित रसिक श्रोताओं ने गुलाल लगाकर कवियों का सम्मान किया। अंत में संयोजक सरल कुमार ने सभी का धन्यवाद दिया।

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