एफएनएन , मानसा (पंजाब) : पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में 24 दिन बाद एक अहम प्रक्रिया पूरी की जा रही है। लंबे समय से मानसा के सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखे उनके शव को रात करीब 12 बजे पोस्टमार्टम के लिए PGI चंडीगढ़ भेज दिया गया। शव को चंडीगढ़ रवाना करने से पहले धरना स्थल पर अरदास की गई। इस दौरान परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह और सीबीआई की टीम मौजूद रही।
24 दिन बाद मानसा से चंडीगढ़ भेजा गया शव
परविंदर सिंह झोटा के शव को मानसा सिविल अस्पताल की मॉर्चरी से बाहर निकालते समय वहां मौजूद लोगों ने ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप किया। इसके बाद शव को आईसीयू वेंटिलेटर और फ्रीजर की सुविधा वाली एंबुलेंस में रखा गया।
शव को PGI चंडीगढ़ भेजने से पहले धरना स्थल पर उसकी आत्मा की शांति के लिए अरदास की गई। इस दौरान झोटा के पिता भीम सिंह भी मौजूद रहे। सीबीआई की टीम की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
सुबह 9 बजे होगा पोस्टमार्टम
परविंदर सिंह झोटा के शव को चंडीगढ़ भेजने के दौरान पंजाब पुलिस के अधिकारी और एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के युवा भी साथ रहे। पुलिस की पायलट गाड़ी एंबुलेंस के आगे चल रही थी।
जानकारी के मुताबिक, PGI चंडीगढ़ में सुबह करीब 9 बजे सूर्योदय के बाद डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। पोस्टमार्टम और ऑटोप्सी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को वापस मानसा लाया जाएगा। गौरतलब है कि झोटा का शव पिछले 24 दिनों से मानसा सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखा हुआ था।
पिता ने मानसा SSP पर लगाए गंभीर आरोप
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के बाद परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने मानसा के एसएसपी के तबादले की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएसपी के कहने पर ही उनके बेटे की हत्या हुई है।
भीम सिंह ने पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब के दूसरे नौजवान नशे की गिरफ्त में न आएं, इसके लिए ड्रग्स के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में पोस्टमार्टम और ऑटोप्सी की प्रक्रिया हो रही है, वह किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद सरकारों से उनकी अपील है कि पंजाब को बचाने के लिए नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मेडिकल स्टोर पर विवाद के बाद मारी गई थीं तीन गोलियां
गौरतलब है कि मानसा जिले के बठिंडा रोड पर मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जानकारी के मुताबिक, झोटा मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने संचालक पर नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया था।
इस दौरान पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी हो रही थी। आरोप है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और बहस के बाद मेडिकल स्टोर संचालक ने झोटा पर तीन गोलियां चला दीं। गोलीबारी की पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी। इसके बाद उन्हें मानसा सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
कौन थे परविंदर सिंह झोटा?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता थे। वह फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुके थे। बाद में उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान शुरू किया और युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने के लिए काम करने लगे।
उन्होंने अपनी एक एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाई थी। इस टीम के जरिए वह कथित नशा तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले करने जैसी गतिविधियों में शामिल रहते थे। उनके परिवार में पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और दो बच्चे हैं।
झोटा की हत्या के बाद से ही मामले को लेकर कार्रवाई और न्याय की मांग उठती रही है। अब 24 दिन बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।







