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हरीश रावत के राजनीतिक सफर का कुआं न बन जाए लालकुआं, पैराशूट बनकर उतरे रावत का क्षेत्र और पार्टी कार्यकर्ताओं में बड़ा विरोध

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एफएनएन, लालकुआं : मुख्यमंत्री रहते पिछले विधानसभा चुनाव में किच्छा और हरिद्वार सीट से बुरी तरह पराजित होने के बाद हरीश रावत ने इस बार लालकुआं को चुना है। पैराशूट प्रत्याशी बनकर आए रावत का इस क्षेत्र में कोई राजनीतिक योगदान नहीं है, ऐसे में यहां के लोगों के बीच वह कैसे पैठ बना पाएंगे ? यह बड़ा सवाल है। आपको बता दें कि लालकुआं से 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर नवीन दुमका 27000 से अधिक वोटों से चुनाव जीते थे। इस बार पार्टी ने उनका टिकट काटकर मोहन बिष्ट को प्रत्याशी बनाया है। मोहन बिष्ट ईमानदार छवि के प्रत्याशी हैं और उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप भी नहीं है, ऐसे में हरीश रावत उनका सामना किस तरह कर पाएंगे ? वह पड़ोसी विधानसभा किच्छा के साथ ही हरिद्वार विधानसभा से पिछले चुनाव में बुरी तरह मात खा चुके हैं। अब उनके लिए लालकुआं में सीधे पैराशूट बनकर उतरना कितना फायदेमंद साबित होगा ? वहीं कांग्रेस से बागी संध्या डालाकोटी हरीश रावत के ताबूत में कील ठोक रही हैं, क्योंकि कांग्रेस ने उनका टिकट घोषित करने के बाद काटा है, ऐसे में लालकुआं के लोगों की हमदर्दी भी उनसे जुड़ी हुई है।

संध्या डालाकोटी साफ आरोप लगा चुकी हैं कि कांग्रेस में महिलाओं का सम्मान नहीं है, इसीलिए पहले लालकुआ सीट पर कांग्रेस ने उनका नाम घोषित किया और फिर हरीश रावत चुनाव लड़ने आ गए। वहीं कांग्रेस में हरीश रावत के खिलाफ गोलबंदी चल रही है। सीधे तौर पर वैसे ही गोलबंदी जैसी पिछले चुनाव में किच्छा में चली थी, ऊपर से ही कार्यकर्ता उनके नजर आ रहे हैं जबकि भीतर से उनको हराने के लिए काम कर रहे हैं और मोहन बिष्ट का समर्थन कर रहे हैं। हरीश रावत के अपने ही उन्हें हराने में लगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि अगर हरीश रावत चुनाव हारे तो कांग्रेस पार्टी की किरकिरी होने के साथ ही मुख्यमंत्री का चेहरा भी वह नहीं होने वाले। आपको बता दें कि कांग्रेस में हरीश रावत को हिटलरशाह की भूमिका दी जाती है। न सिर्फ प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव से उनकी अनबन सार्वजनिक है बल्कि नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी उनकी नहीं पटती। इंदिरा हिरदेश का निधन हो चुका है, उन्हें भी हरीश रावत अपनी राह में बड़ा कांटा मानते थे, लेकिन हरीश रावत को इस चुनाव में कितना फायदा मिलने वाला है, यह लालकुआं का मूड देखने से खुद ही समझ आ जाता है। अभी तक न सिर्फ प्रचार में, बल्कि लोगों की जुबान पर भी भाजपा ही नजर आ रही है। ऐसे में लालकुआं से हरीश रावत किस तरह चुनाव जीत पाएंगे यह बड़ा सवाल है।

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