एफएनएन, रुद्रपुर : उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी मतभेदों के बीच प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कार्यकर्ताओं को सख्त और साफ संदेश दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि कार्यकर्ता यह सोचकर न बैठें कि जनता खुद कांग्रेस को वोट देगी, बल्कि उन्हें घर-घर जाकर भाजपा की नाकामियां और कांग्रेस की सक्रियता बतानी होगी। शैलजा ने स्पष्ट किया कि चुनाव जीतने का रास्ता सिर्फ मैदान में उतरकर मेहनत करने से ही निकलेगा।
टिकट वितरण को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए—“टिकट बनते भी हैं और कटते भी हैं”, लेकिन इससे पार्टी के प्रति आस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए। वहीं, नाराजगी को लेकर बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि “नाराजगी अपनी जगह है, लेकिन पार्टी का काम अपनी जगह है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि परिवार में कोई नाराज है, तो उसे मना लिया जाएगा। शैलजा का यह संदेश साफ तौर पर संगठन के भीतर अनुशासन, सक्रियता और एकजुटता पर जोर देने वाला माना जा रहा है।
केसरी होटल बना सियासी अखाड़ा, लोकेशन कंफ्यूजन से बढ़ी नाराज़गी
दिल्ली से लौटते वक्त कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का केसरी होटल पर ठहराव स्थानीय सियासत में हलचल पैदा कर गया। कार्यकर्ताओं ने यहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसमें विधायक तिलक राज और वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल सिंह राजू भी मौजूद रहे। लेकिन इस स्वागत कार्यक्रम के बीच एक छोटी सी चूक ने कांग्रेस के भीतर की हल्की खींचतान को सामने ला दिया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को जैसे ही शैलजा के केसरी होटल पहुंचने की सूचना मिली, वे रामपुर रोड स्थित केसरी की ओर निकल पड़े।
जबकि शैलजा काशीपुर रोड वाले केसरी होटल में मौजूद थीं। जब तक यशपाल आर्य सही लोकेशन पर पहुंचे, तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस देरी को लेकर उनकी नाराजगी भी सामने आई। उन्होंने साफ कहा कि जब कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं था, तो फिर इस तरह का आयोजन किसने और कैसे कर दिया।
हालांकि, बाद में मामला शांत हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी और अंदरूनी असहजता की झलक जरूर दिखा दी।





