एफएनएन, देहरादून : Haridwar Tiger Poaching Case उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग में दो बाघों के शिकार का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर होता जा रहा है। श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट में दो टाइगरों की संदिग्ध मौत के बाद अब नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की टीम उत्तराखंड पहुंचने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ वन विभाग की अब तक की जांच की भी समीक्षा करेगी।
इस घटना के बाद वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल के भीतर दो बाघों का शिकार हो जाना और लंबे समय तक इसकी जानकारी न मिलना विभागीय लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
मामले में संबंधित रेंज के रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसे विभाग का बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि पहले ऐसी कार्रवाई केवल फॉरेस्ट गार्ड या बीट कर्मचारियों तक सीमित रहती थी। इस बार वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी तैयारी दिखाई दे रही है।
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने खुद हरिद्वार पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, शिकार के पीछे संगठित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। वन विभाग और पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
उधर, NTCA की संभावित जांच को बेहद अहम माना जा रहा है। टीम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, गश्त रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और जुटाए गए साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच कर सकती है। यदि जांच में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो विभागीय अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई संभव है।
इस घटना ने उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हाल के महीनों में हाथियों की संदिग्ध मौत, सांपों के जहर की तस्करी और अब टाइगर शिकार जैसी घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।






