- राजकुमार ठुकराल के चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही बदले समीकरण
- भाजपा को है डर, ठुकराल चुनाव लड़े तो नतीजे होंगे चौंकाने वाले
कंचन वर्मा, रुद्रपुर : पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की दावेदारी के बाद रुद्रपुर की मेयर सीट पर सियासत ने ‘ यू टर्न ‘ ले लिया है। यह सीट सामान्य होने की चर्चा भी अब करवट ले चुकी है। सियासतदारों के सामने भी तस्वीर साफ हो चुकी है कि अगर सीट सामान्य हुई तो राजकुमार ठुकराल भाजपा का गणित पलट सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अंदर ही अंदर पक रही सियासी खिचड़ी में यह सीट ओबीसी पुरुष या महिला के नाम जा सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा का यह कदम ठुकराल की कांग्रेस की ओर बढ़ती राजनीति को रोकने वाला भी साबित होगा !
भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रहे राजकुमार ठुकराल का गुजरा विधानसभा चुनाव उनकी 11वीं परीक्षा था। लगातार 10 चुनाव जीतने के बाद निर्दलीय लड़े ठकराल 11वां चुनाव 27,000 वोट लेकर हार गए थे। दो साल से अधिक समय बीत चुका है, ठुकराल की भाजपा में लौटने की कोशिशे नाकाम साबित हुईं, अब उन्होंने कांग्रेस की ओर रुख कर लिया है। ऐलान कर दिया है कि वह कांग्रेस के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़ेंगे। सीट सामान्य न हुई तो भी वह कांग्रेस को ही लडाएंगे।
आरक्षण से पहले ठुकराल के इस ऐलान को जल्दबाजी माना जा रहा है लेकिन भाजपा ने अपने निर्णय पर मंथन शुरू कर दिया है। भाजपा को डर है कि अगर यह सीट सामान्य हुई तो ठुकराल बाजी पलट सकते हैं, इसीलिए सीट पर आरक्षण का गणित और भाजपा की प्लानिंग पासा पलट सकती है। पिछले दो कार्यकाल में यह सीट एससी महिला और फिर एससी पुरुष रह चुकी है, तो ऐसे में इस सीट पर ओबीसी का फॉर्मूला काम कर सकता है। सीट महिला या पुरुष हो सकती है। obc से मानस जयसवाल प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। हालांकि नाम उपेंद्र चौधरी का भी चल रहा है लेकिन सूत्रों की मानें तो आड़े उनकी नगर निगम से ब्लैकलिस्टेड कंपनी आ रही है, इसके साथ ही कांग्रेसी नेताओं से जुड़ी बैकग्राउंड भी किसी से छुपी नहीं है। खैर, ओबीसी पर मौका किसे मिलता है यह बात अलग है लेकिन भाजपा ने पत्ते पलटना शुरू कर दिया है।
क्योंकि यह सीट पूर्व में लगातार दो बार एससी महिला और पुरुष रह चुकी है तो ऐसे में कम ही संभावना है की सीट एससी के खाते में जाएगी। हालांकि एससी सीट के लिए दावेदार अपने पक्ष में आरक्षण कराने को नेताओं का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में यह खबर एससी और सामान्य दावेदारों के लिए हैरान करने वाली है।
काशीपुर का ‘ गणित ‘ पलटने की मंशा पर भारी रुद्रपुर
आरक्षण का गणित इससे पहले कहीं न कहीं काशीपुर पर फोकस हो रहा था। माना जा रहा था कि गुटबाजी के चलते काशीपुर से ऊषा चौधरी का पत्ता साफ करने के लिए आरक्षण को बदला जा सकता है। ओबीसी सीट पर दो बार मेयर का चुनाव जीतीं ऊषा चौधरी इस बार भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं, ऐसे में उनको चुनाव लड़ने से रोकने के लिए इस सीट पर एससी का फार्मूला लागू हो सकता है। इस सीट को सामान्य किया जाता तो भी ऊषा चौधरी का दावा पक्का था, ऐसे में एससी का फार्मूला ही उनकी राह रोक सकता है।
अगर काशीपुर सीट एससी होती तो रुद्रपुर के सामान्य होने की प्रबल संभावनाएं थीं लेकिन यहां ठुकराल की दावेदारी ने गुटबाजी के इस खेल में बड़ा रोड़ा पैदा कर दिया है। प्रदेश के नगर निगमो में मेयर की दो सीट एससी होनी हैं, तो पहला दावा श्रीनगर का बन रहा है, जहां रुद्रपुर के मुकाबले एक फीसद ज्यादा एससी वोट है। श्रीनगर के बाद गुटबाजी के तहत अगर काशीपुर को एससी किया जाता है तो रुद्रपुर सीट अब ठुकराल बंधुओं की दावेदारी से ओबीसी के खाते में जा सकती है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि सीट ओबीसी होगी तभी ठुकराल की दावेदारी नहीं हो सकेगी। अब देखना यह होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।







