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जीवनसाथी की दीर्घायु के लिए सुहागिनें सोलह श्रृंगार के साथ आज करवा चौथ का व्रत, इस विधि से करें पूजा

एफएनएन, देहरादून:  जीवनसाथी की दीर्घायु के लिए सुहागिनें सोलह श्रृंगार के साथ आज करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। पति के लिए आज पत्नियां सोलह श्रृंगार करके चांद के सामने पूजा करेंगी। रात 8:26 बजे चांद के दर्शन होंगे। पूजा-अर्चना का मुहूर्त शाम 5:44 से 7:02 तक रहेगा। आज के इस खास मौके के लिए कई दिनों से सुहागिनों ने तैयारी शुरू कर दी थी।

मंगलवार को पर्व की पूर्व संध्या पर शृंगार, मेहंदी, पूजा व व्रत से जुड़ी सामग्री की खरीदारी को लेकर बाजार गुलजार रहे। देर रात तक मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। ज्यादा भीड़ के कारण देर शाम पलटन बाजार में पैदल चलने वालों को भी काफी परेशानी हुई। लाइन में लगकर महिलाओं को खरीदारी व मेहंदी लगवाने के लिए इंतजार करना पड़ा। ग्राहकों की भीड़ देखकर दुकानदार खासा उत्साहित दिखे।

क्यों मनाया जाता है करवा चौथ

पति-पत्नी के स्नेह व समर्पण के भाव को दर्शाता करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य व सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से पहला निवाला लेकर व्रत खोलती हैं।

महिलाओं ने खरीदा पूजा का सामान

करवाचौथ की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने करवा, कैलेंडर, शृंगार का सामान, सजावटी छलनी, थाली, सीक, साड़ियां आदि सजने-संवरने का सामान खरीदा। इसके अलावा मिष्ठान, फल, ड्राइफ्रूट आदि दुकानों पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ रही।

सुबह से शाम तक बढ़ते गए मेहंदी के दाम

पलटन बाजार, झंडा बाजार में जैसे-जैसे दिन निकलता गया मेहंदी लगवाने के लिए दाम भी बढ़ते गए। शाम को सबसे ज्यादा दामों में महिलाओं ने मेहंदी लगवाई। सुबह छापे वाली मेहंदी के दाम 50 रुपये, हाथ के लिए 200, जबकि कोहनी तक मेहंदी लगाने के 400 रुपये लिए जा रहे थे, जिनके दाम शाम तक क्रमश: 80, 300 व 600 रुपये तक पहुंच गए।

आज रात नौ बजकर 20 मिनट तक रहेगी चतुर्थी

उत्तराखंड विद्वत सभा के अध्यक्ष आचार्य बिजेंद्र प्रसाद ममगाईं के अनुसार करवा चौथ का मुहूर्त मंगलवार रात 9:30 बजे से बुधवार रात 9:20 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय रात 8:26 बजे तक हो जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां पार्वती ने प्रथम बार भगवान शिव के लिए निर्जला व्रत रखा था। इसके अलावा मां सीता व मां द्रोपदी ने भी यह व्रत किया था। उन्होंने ही करवा का उपयोग किया, तब से यह परंपरा शुरू हुई।

यह है पूजा का विधान

सुबह स्नान के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और निर्जला उपवास शुरू करें। शाम के समय मिट्टी के बर्तन में वेदी बनाकर शिव परिवार की स्थापना करें। एक थाली में धूप, दीप चंदन, रोली, सिंदूर रखें और घी के दीये जलाएं। चंद्रोदय के साथ पूजा करें। इस समय करवा चौथ की कथा जरूर सुनें। चांद को छलनी से देखने के बाद जल चढ़ा कर चंद्रमा की पूजा करें। जीवनसाथी के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

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