Tuesday, January 13, 2026
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फर्जी प्रमाण पत्र मामला : उत्तराखंड में शिक्षा विभाग में 52 टीचरों पर लटकी जांच की तलवार

एफएनएन, देहरादून : उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के अंतर्गत 52 शिक्षकों पर अब जांच की तलवार लटक रही है. वैसे तो फर्जी प्रमाण पत्र मामले को लेकर काफी पहले ही कई शिक्षक सवालों के घेरे में आ चुके थे, लेकिन मामले के कोर्ट तक पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग भी प्रकरण पर गहरी नींद से जाग गया है. मामले में अब फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर नौकरी पाने वालों के खिलाफ जांच का दावा किया गया है.

52 टीचरों पर लटकी जांच की तलवार: शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी पाने के मामले यूं तो पहले भी आते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला दिव्यांग जनों के हक से खिलवाड़ करने का है. इस मामले में शिक्षा विभाग पहले ही काफी हद तक यह स्पष्ट कर चुका है कि कई शिक्षकों द्वारा फर्जी तरह से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए और इसी के आधार पर उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी पाई.

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी लेने का है शक: मामला तब सामने आया जब खुद दिव्यांग जन फर्जी प्रमाण पत्र की शिकायतों को लेकर कोर्ट की शरण में पहुंच गए. इस मामले में न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन ने जनहित याचिका के आधार पर शिक्षा विभाग से उन शिक्षकों की सूची मांगी है, जिनके प्रमाण पत्र पूर्व में फर्जी पाए गए थे. खास बात यह है कि इसके बाद जाकर शिक्षा विभाग ने आनन फ़ानन में ऐसे शिक्षकों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी कर दिया. इस मामले में दिव्यांग जन लगातार ऐसे फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद करीब 2 साल बीतने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

तय नहीं हुई जवादेही: बड़ी बात यह है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा ऐसे शिक्षकों को किस तरह प्रमाण पत्र दे दिए गए, इस पर भी अभी कोई जवाब देही तय नहीं हुई है. हालांकि जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनाए गए.

फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालों के खिलाफ जांच शुरू: सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि दिव्यांगता प्रमाण पत्रों का अनुचित लाभ उठाने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच बिठा दी गई है. निदेशक माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति केस-टू-केस के आधार पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर गलत लाभ लेने वाले शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी.

52 टीचरों की सूची जांच के लिए उपलब्ध कराई गई है: धन सिंह रावत ने बताया कि- उच्च न्यायालय में योजित जनहित याचिका के क्रम में आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा अपात्र 52 शिक्षकों की सूची जांच के लिये उपलब्ध कराई गई थी. इनमें 02 प्रधानाध्यापक, 21 प्रवक्ता व 29 सहायक अध्यापक शामिल थे. इन सभी शिक्षकों को विभागीय स्तर पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इसके क्रम में 20 प्रवक्ता तथा 9 सहायक अध्यापकों ने अपना जवाब विभाग को उपलब्ध करा दिया है. रावत ने बताया कि गलत तरीके से आरक्षण का लाभ उठाने वाले शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कार्मिकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जायेगी. इसके लिये विभागीय स्तर पर अन्य कार्मिकों के भी प्रमाण पत्रों की पृथक जांच से की जायेगी. -धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड-

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