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ED ने SC का दरवाजा खटखटाया, बंगाल CM और पुलिस अधिकारियों पर जांच की मांग

एफएनएन, नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उसकी याचिका से पश्चिम बंगाल की चौंकाने वाली स्थिति का पता चलता है, जहां कानून के रक्षक, यानी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (CM) और बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर), ही गंभीर संज्ञेय अपराधों में शामिल हैं, जिनके लिए ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार (2014) निर्णय के तहत FIR दर्ज करने की जरूरत है.

ईडी ने मुख्यमंत्री, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है. उनका दावा है कि उन्होंने पिछले हफ्ते पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस में तलाशी अभियान के दौरान कानूनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रुकावट डाली, डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट्स जबरदस्ती छीन लिए और ईडी अधिकारियों को गलत तरीके से कैद किया.

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 160 पेज की ईडी की अर्जी में कहा गया है कि यह पश्चिम बंगाल में चौंकाने वाली स्थिति का खुलासा करती है, जहां कानून के रक्षक ही गंभीर संज्ञेय अपराधों में शामिल हैं, जिनके लिए ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार (2014) के तहत FIR दर्ज करने की जरूरत है. याचिका में कहा गया है कि ईडी याचिका से सामने आई सबसे असाधारण, असामान्य और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के कारण सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जाने के लिए मजबूर है.

केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि वह एक बहु-राज्यीय मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की जांच कर रही है, जिसके तहत अवैध कोयला खनन से 2742.32 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जो सरकारी खजाने के खर्च पर हुई और काली कमाई को सफेद पैसे के रूप में दिखाया गया.

ईडी ने कहा कि उसके अधिकारियों ने प्रतीक जैन नाम के एक व्यक्ति के घर की तलाशी ली, क्योंकि वहां अपराध के जरिये 20 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई थी. याचिका में कहा गया है, “लेकिन, अधिकारियों और सभी संबंधित लोगों को यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री खुद, पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर, पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ उस जगह पर जबरन घुस गईं जहां तलाशी चल रही थी.”

याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने न सिर्फ उसके अधिकारियों को डराना-धमकाना शुरू कर दिया, बल्कि ईडी के अधिकारियों से आपत्तिजनक सामग्री वाली फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी छीन लिए. याचिका में कहा गया है कि ईडी के अधिकारियों से जो छीना गया, वह पहले अधिकारियों ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सबूत इकट्ठा करने के लिए अपनी ऑफिशियल ड्यूटी के दौरान अपने कब्जे में ले लिया था.”

याचिका में कहा गया है, “क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री खुद, पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारी/अधिकारी खुद गंभीर अपराधों में शामिल हैं, इसलिए FIR दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस से संपर्क करना न सिर्फ व्यर्थ होगा, बल्कि इससे स्थानीय पुलिस भी ठीक से जांच नहीं करेगी और मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए घटिया जांच करेगी.”

याचिका में यह भी कहा गया कि संयोग से यह भी बताया जा सकता है कि इस याचिका में जिस मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप बताए गए हैं, वह राज्य की गृह मंत्री हैं जिनके तहत पुलिस विभाग काम करता है. ईडी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और करीब 100 पुलिसवालों के साथ 8 जनवरी को तलाशी के लिए उस जगह पर घुस गईं, जहां ईडी अधिकारी PMLA कानून की धारा 17 के तहत I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के घर और I-PAC के ऑफिस में तलाशी अभियान चला रहे थे.

ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 21, और 22 का इस्तेमाल करके अपने अधिकारियों को राज्य सरकार की तरफ से ‘गलत इरादे से आपराधिक केस’ और धमकी से बचाने की मांग की है. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से इस घटना की स्वतंत्र CBI जांच का आदेश देने का अनुरोध किया है.

ईडी की अर्जी में कहा गया, “क्योंकि मुख्यमंत्री के साथ आए लोगों की संख्या पांच से अधिक थी और उन्होंने डकैती की, और क्योंकि वे जानलेवा हथियारों से लैस थे, इसलिए वे BNS (भारतीय न्याय संहिता), 2023 की धारा 310 के तहत डकैती के जुर्म के भी दोषी हैं, जिसमें कम से कम 7 साल की सजा निर्धारित है.”

याचिका में कहा गया कि ईडी के अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ, जिससे अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 के तहत उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार टूट गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तलाशी के दौरान उन्हें गलत तरीके से रोककर रखा गया, जब बंगाल की मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ-साथ स्थानीय पुलिस में पुलिस कमिश्नर और डीजीपी जैसे बड़े अधिकारियों ने अचानक तलाशी की कार्रवाई में रुकावट डाली और उन्हें जगह से बाहर निकलने से रोक दिया.

I-PAC 2019 के लोकसभा चुनावों से ही टीएमसी के साथ जुड़ा हुआ है. साथ ही आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की चुनावी रणनीति की देखरेख कर रहा है.

ईडी की याचिका में कहा गया है, “यह बताया गया है कि कोर्ट की कार्यवाही के रिकॉर्ड में यह बात है कि प्रतिवादी नंबर 2, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कानून अपने हाथ में लेने और राज्य पुलिस का गलत इस्तेमाल करने का एक पैटर्न बना लिया है, जब भी किसी ऐसे अपराध की जांच होती है जो उन्हें पसंद नहीं है या जिसमें उनके, उनके मंत्रियों, उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं या मिलीभगत से काम करने वाले कुछ अधिकारियों के खिलाफ कुछ गलत जानकारी मिलने की संभावना है.”

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