- सक्रिय और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जगह अपनों को स्थान देने से बनी है विवाद की स्थिति
- भीतर ही भीतर फूट रहे हैं विरोध के स्वर, ठीकरा फूट रहा है कई एक के सिर
कंचन वर्मा, रुद्रपुर : संगठन ही पार्टी की रीढ़ होता है और इसी के बलबूते चुनाव भी, लेकिन बात ऊधमसिंह नगर की करें तो यहां कुछ और ही चल रहा है। जिलाध्यक्षों की घोषणा के साथ ही यहां संगठन में अपनों को जगह देने के लिए बड़ा खेला कर दिया गया। जिले से लेकर मंडल और अनुसांगिक संगठनों में ऐसे लोगों को मनमानी तरीके से जगह दे दी गई, जिनका न कोई वजूद है और न ही वो डिजर्व करते हैं।
योग्यता के नाम पर सिर्फ चाटुकारिता और नेताओं की परिक्रमा भर उनके नाम दर्ज है। ऐसे में निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता हुआ नजर आ रहा है। दबी जुबान से ही सही, पर ये सभी चुनाव में पार्टी को सबक सिखाने का मन बना चुके हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा किस तरह इसी साल होने वाले निकाय चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए इनको मना पाती है। अनुशासन का दंभ भरने वाली भाजपा में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा। ऊधमसिंह नगर में पार्टी कुछ और ही राग अलाप रही है।

जिले से लेकर मंडल तक कार्यकारिणी भले ही गठित कर दी गई हों, लेकिन सभी के पीछे ‘ डिक्टेटरशिप ‘ जैसा भाव नजर आ रहा है। रुतबा और मनमानी ही कहेंगे कि मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में तो जातिगत समीकरणों के साथ ही नियम को भी दरकिनार कर दिया गया, यहां भी अपने चेहरों को प्राथमिकता दी गई। अनुसांगिक संगठनों में भी खेला खेला गया।
मेन बॉडी में ही पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की उपेक्षा कर दी गई। कहने भर को गजेंद्र सिंह प्रजापति को कार्यालय प्रभारी के तौर पर संगठन में स्थान दिया गया। अनुसूचित मोर्चा के प्रभारी की नियुक्ति में भी गड़बड़झाला हुआ। यहां तक कि महिला मोर्चा का प्रभारी पुरुष को बना दिया गया। काशीपुर में तो जिला मंत्री के निर्धारित 6 पदों के मानक ही बदल दिए गए। यहां अपनी मनमर्जी के मुताबिक सातवां पद ही क्रिएट कर दिया गया।
कुल मिलाकर संगठन में यह खेला भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। ऐसे समय में जबकि नगर निकाय और लोकसभा चुनाव निकट हैं, पार्टी का एक्सपेरिमेंट उसी का बेड़ागर्क कर सकता है। नाराजगी के रूप में सामने आ रही कार्यकर्ताओं की दबी जुबान से बातें इसका अर्थ समझने के लिए काफी हैं।
- संगठन में आखिर किसका ‘ विकास ‘
रुद्रपुर : प्रदेश में विकास का राग अलापने वाली भाजपा ऊधमसिंह नगर जिले में ‘ विनाश ‘ की ओर तो नहीं जा रही ! ऐसा इसलिए क्योंकि गुटबाजी ही पार्टी का सत्यानाश करने पर लगी है। कुछ बड़े नेताओं के चेहरे का फायदा उठा रहे हैं तो कुछ अहम और वहम के फेर में हैं। एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए भी ताबड़तोड़ कोशिशें चल रही हैं। खास तौर पर मुख्यमंत्री के साथ चेहरा दिखाने वालों की तो होड़ मची है। वह चेहरे जो पार्षद का चुनाव तक नहीं जीत सकते, सिरमौर बने हैं। उनकी सोंच पार्टी के हित में कम, स्वयं भू बनने की ज्यादा है। ऐसे में जबकि विधानसभा चुनाव में पार्टी को तराई की नौ में सिर्फ 4 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है।

बड़ा सवाल ! जिला कार्यालय में क्यों नहीं हुई मंडल कार्यसमिति
रुद्रपुर : बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर उत्तरी और दक्षिणी मंडल की कार्यसमिति भाजपा के भव्य जिला कार्यालय में क्यों नहीं हुईं। दक्षिणी मंडल की कार्यसमिति सिटी क्लब तो उत्तरी मंडल की ट्रांजिट कैंप में हुई। यहां भी चंद कार्यकर्ता ही जुट सके। दक्षिणी मंडल की कार्यसमिति में तो विधायक शिव अरोरा को हिंदू हृदय सम्राट राजकुमार ठुकराल कहकर संबोधित कर दिया गया, वहीं भाजपा से पूर्व में निष्कासित और आजकल सुर्खियां बने एक पदाधिकारी को मुख्यमंत्री तक बोल दिया गया। ऐसे में कहीं न कहीं दोनों कार्य समितियों में अनुभव की कमी साफ नजर आई। कुल मिलाकर भाजपा को जरूरत है आत्ममंथन की, अन्यथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मेहनत पर पानी फिरना तय है।





