एफएनएन, देहरादून : Badri Kedar मंदिर समिति (BKTC) द्वारा दान की राशि से कथित तौर पर वीआईपी मेहमानों के ठहरने और अन्य खर्च किए जाने के मामले में अब जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई है। रिपोर्ट में एक ओर यह कहा गया है कि होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन अभी जारी है, वहीं दूसरी ओर तत्कालीन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता का जिम्मेदार भी ठहरा दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पूरी जांच पूरी होने से पहले ही निष्कर्ष निकाल दिए गए।
रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी (CEO), तत्कालीन व्यवस्थापक और मुख्य प्रभारी अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अभी अधूरी बताई गई है।
भाजपा नेताओं के भुगतान पर भी खड़े हुए सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिन वीआईपी मेहमानों पर मंदिर समिति की ओर से खर्च किए जाने की बात सामने आई, उनमें कुछ भाजपा नेताओं के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, जांच के दौरान इन नेताओं के बयान दर्ज नहीं किए गए। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने भी कहा कि उनसे इस मामले में न तो कोई संपर्क किया गया और न ही कोई बयान लिया गया।
वहीं, जब उनसे उनके द्वारा किए गए भुगतान के प्रमाण मांगे गए तो उन्होंने बताया कि उनके पास भुगतान से जुड़ा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसी तरह रिपोर्ट में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी के बारे में भी उल्लेख है कि वह कथित भुगतान से संबंधित कोई रसीद या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि संबंधित खर्च का भुगतान वास्तव में किसने किया और क्या भुगतान के दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, भाजपा ने दी सफाई
मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष इस पूरे विवाद को सरकार और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली से जोड़कर सवाल उठा रहा है। वहीं भाजपा का कहना है कि वर्तमान सरकार अनियमितताओं को छिपाने के बजाय उन्हें सामने लाकर कार्रवाई कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि कहीं वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी अनियमितताएं पहले से होती रही होंगी, लेकिन वर्तमान सरकार ने उन्हें उजागर करने और रोकने का काम किया है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और होटल बिल, भुगतान रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।







