फ्रंट न्यूज नेटवर्क, फतेहगंज पश्चिमी-बरेली। गांव खिरका में चल रही साप्ताहिक श्रीरामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ ने श्रीराम जन्म की पावन कथा सुरसरि में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं को भक्ति-प्रेम-आनंद की खूब डुबकियां लगवाईं।

अनेक कल्पों में रामावतार के अलग-अलग कारणों का संगीतमय बखान करते हुए कथाव्यास ने समझाया कि प्रभु अपने भक्तों को आनंद देने और आतताइयों का विनाश करने के लिए ही मृत्युलोक में अवतरित होते हैं।

श्रीराम और उनके भाइयों के जन्म के शुभ अवसर पर राजा दशरथ, तीनों माताओं और अयोध्या की प्रजा तो हर्ष-आनंद के सागर में गोते लगा ही रहे हैं, देवताओं की खुशियों का भी ठिकाना नहीं है।

श्रीराम जन्म का शुभ समाचार प्राप्त होते ही देवताओं में भी उनकी एक झलक पाने की मानों होड़ सी लग गई। कथाव्यास उस मनोरम दृश्य को अनूठी शब्दमाला में कुछ इस तरह पिरोते हैं-
जन्म लियो रघुरइया
आज बाजै बधइया।
और…
सब देव चले महादेव चले लेकर फूलों के हार चले
आयो राघव सांवरिया!
शिवशंकर ने आगे बढ़कर अपनो डमरू बजायो।

कथाव्यास श्री ‘सरस’ जी बताते हैं कि श्रीराम जन्म पर अयोध्या खुशियों से झूम रही है। राजा दशरथ ने तो इस खुशी के अवसर पर-
“सर्वस दान कीन्ह सब काहू
जिन्ह पावा राखा नहिं ताहू।”

कथाव्यास महाराज श्री ने भक्तजनों को श्रीरामचरित मानस की इस चौपाई का गूढ़ार्थ भी विस्तार से समझाया।

आज की कथा में भी मुख्य यजमान नत्थूलाल पुजेरी, पूर्व प्रधान कृष्णपाल गंगवार, पत्र कारण कवि गणेश ‘पथिक’, दीनानाथ, राधेश्याम, भूपराम, हरदयाल, बड़के गंगवार, महेश सक्सेना, अरविन्द गंगवार, रवींद्र गंगवार समेत बड़ी तादाद में महिला-पुरुष एवं बाल श्रद्धालु सम्मिलित रहे।





