एफएनएन, देहरादून : अर्जुन और उसकी मां के बीच रिश्ते अचानक खराब नहीं हुए। मां-बेटे के रिश्ते में दरार आने की शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। जब अर्जुन ने व्यवसाय संभालना शुरू किया। वह व्यवसाय के पैसे किसी दूसरे को देने का विरोध करने लगे। यहीं से मां-बेटे के रिश्ते बिगड़ने लगे। धीरे-धीरे वे इतने खराब हुए कि जो मां अर्जुन को दुनिया में लेकर आई उसी ने उसकी जिंदगी छीन ली।
जांच में जो बात सामने आई है उसके दो हिस्से हैं। पहला गैस एजेंसी का लोन चुकाने से शुरू हुआ विवाद और दूसरा प्रॉपर्टी बेचने का। बीना के प्रॉपर्टी बेचने के बाद अर्जुन के स्टे लेने से रिश्ते इतने बिगड़े की मां ने उसे रास्ते से हटाने की ठान ली। अर्जुन के पिता कर्नल रमेश चंद शर्मा करीब 38 वर्ष पूर्व बलिदान हो गए।
इसके बाद सरकार ने बलिदानी कोटे से एजेंसी दी। इस संपत्ति पर शर्मा परिवार ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आठ करोड़ रुपये का लोन लिया था। इस पर भी विवाद था। करीब आठ माह पहले बीना ने जीएमएस रोड स्थिति पैतृक संपत्ति का डॉ. अजय खन्ना के साथ 14 करोड़ में सौदा कर लिया। चार करोड़ से लोन चुकता हुआ।
डॉ. खन्ना का भी था दबाव
आठ करोड़ रुपये बीना शर्मा के खाते में आ गए। इन पैसों को बीना ने अगले ही दिन अपने साथी विनोद उनियाल को ट्रांसफर कर दिया। इससे अर्जुन बेहद खफा था। वह पैतृक संपत्ति में अपना आधा हिस्सा चाह रहा था। मां-बेटे पुलिस के पास पहुंचे थे। वहीं, डॉ. अजय खन्ना और बीना के बीच इस बात का करार हुआ था कि सौदा पूरा न होने पर दी गई रकम की दोगुनी वापस करनी होगी। अर्जुन अदालत से स्टे लेकर आ गया। इससे सौदा पूरा नहीं हुआ पुलिस ने बताया कि डॉ. खन्ना बीना पर लगातार दबाव बना रहे थे। इसलिए मिलकर तीनों ने अर्जुन की हत्या की साजिश रच डाली।
बीना के खाते से विनोद को करोड़ों के लेनदेन के सबूत
पुलिस को जांच में बीना के खाते से विनोद को करोड़ों रुपये भेजने के सबूत मिले हैं। बीना ने प्रॉपर्टी के सौदे के आठ करोड़ रुपये भी भेजे थे। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने पुलिस को दी तहरीर में 20-25 करोड़ रुपये विनोद को देने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इसकी जांच की तो करोड़ों के लेनदेन के सबूत मिले हैं।
मां के नाम पर है गाड़ी
तिब्बती मार्केट के बाहर जिस जगह पर अर्जुन को गोली मारी गई उससे कुछ ही दूरी पर अर्जुन की लाल रंग की कार खड़ी थी। उसके नंबर में 786 सबके कौतूहल का विषय बना हुआ था। बताया जा रहा है कि ये कार उसकी मां बीना शर्मा के नाम पर पंजीकृत है।
शूटर मेरठ से लाए थे हथियार
पुलिस ने मुठभेड़ में गोली मारने के दोनों आरोपियों के पास से देसी तमंचे बरामद किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों पूर्व में मेरठ में रहे हैं और उनके वहां संबंध हैं। वहीं से दोनों हथियार लेकर आए थे।
हिस्ट्रीशीट जानने के लिए सहारनपुर की खुलेगी फाइल
राजीव की हिस्ट्रीशीट जानने के लिए सहारनपुर की फाइल खोलनी पड़ेगी। क्योंकि इसने राज्य बनने से पहले 1997 में हत्या की थी और सहारनपुर जेल में बंद था। अब तक की जानकारी में सामने आया है कि वहां से 2001 में बरी हो गया था। एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि तब की फाइल खोलकर देखा जाएगा कि ये किन परिस्थितियों में बरी हुआ।
सगे भाई हैं दोनों, पिता की भी हुई थी हत्या
राजीव और पंकज दोनों बदमाश सगे भाई हैं। वह मूल रूप से पौड़ी के रहने वाले हैं। इनमें से राजीव ने 1997 में अपने सौतेले पिता की हत्या की थी। वह जेल भी गया था। बताया जा रहा है कि इनकी मां के दो पति थे। इनके पिता की हत्या इन बदमाशों के चाचा ने की थी। इसके बाद ही ये अपना मूल गांव देवीखाल छोड़कर दून आ गए थे।