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बेसिक शिक्षा विभाग का अनलिखा कानूनः छुट्टी लेनी है तो देनी ही होगी 2000 तक घूस

  • यूपी के तमाम जिलों में शिक्षकों के बीच विभाग के ताजा गोपनीय सर्वे में हुआ चौंकाने वाले काले सच का खुलासा 

एफएनएन, लखनऊः बेसिक शिक्षा विभाग की अपनी  ही एक ताजा गोपनीय सर्वे रिपोर्ट में छुट्टियां मांगने के एवज में मजबूर शिक्षकों से संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा मोटी रकम घूस में लेने के काले सच का बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में पेश किए गए तथ्यों पर यकीन करें तो प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को छुट्टियां मांगने के एवज में 500 से लेकर 2000 रुपये तक की मोटी रकम संबंधित विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को घूस में देनी पड़ रही है। खास बात यह भी है कि यह गंदा सिलसिला बचपन को नई दिशा देने वाले उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में वर्षों-बरस से बदस्तूर चला आ रहा है। रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया है कि छुट्टियों के दिन और बढ़ाने पर घूस की रकम भी बढ़ जाती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि छुट्टियां देने के लिए शिक्षकों का कई और तरीकों से भी शोषण भी किया जाता है।

सर्वे में 10 फीसद से ज्यादा ने लगाई घूसखोरी पर मुहर

बेसिक शिक्षा विभाग ने आईवीआरएस कॉल के माध्यम से विभिन्न जिलों में तैनात हजारों महिला-पुरुष शिक्षकों से सर्वे कर हाल ही में यह सनसनीखेज और चौंकाने वाली रिपोर्ट तैयार की है। महकमे के जिम्मेदार अफसरों को इस गोपनीय रिपोर्ट को तैयार करने के लिए कई दर्जन जिलों के कुल 12733 शिक्षकों से फोन पर लंबी बातें करनी पड़ीं। अधिकारियों ने इन सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं से छुट्टियां स्वीकृत करवाने में विलंब और शोषण से संबंधित ढेर सारे सवाल पूछे।1548 यानि 10 फीसदी से भी ज्यादा शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बेहिचक कहा कि छुट्टियां देने के बदले उनका बेहिसाब आर्थिक शोषण किया जाता है। इल्जाम लगाया कि बगैर घूस लिए अधिकारी छुट्टियां मंजूर ही नहीं करते हैं। घूस लेने के लिए उन्होंने अपने-अपने मुंहलगे बाबू मुकर्रर कर रखे हैं।

छुट्टियों की किस्म से तय होते हैं घूस के रेट

बेसिक शिक्षा विभाग की इस विस्फोटक रिपोर्ट में दावा यह भी किया गया है कि शिक्षकों को मेडिकल लीव या बच्चों की देखभाल के लिए छुट्टियां लेने पर भी घूस देनी ही पड़ती है। छुट्टियों की किस्मों के हिसाब से घूस के  अलग-अलग रेट भी पहले से ही तय कर लिए गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक जो शिक्षक-शिक्षिकाएं छुट्टियां लेने के लिए घूस नहीं देते हैं तो उनके प्रार्थनापत्रों को अनावश्यक पेंडिंग में डाल दिया जाता है।

घूस न मिले तो पेंडिंग में पड़ जाती हैं अर्जियां

यह भी दावा किया गया है कि ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी आवेदन पत्र के साथ मनचाही घूस मिलने पर ही छुट्टियों की अर्जियां देखने का कष्ट उठाते हैं। विभागीय सर्वे में यह भी साफ हुआ है कि जरूरत और छुट्टियों के दिनों को देखते हुए घूस के रेट तय किए गए हैं। अगर नई भर्ती वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं अपनी शादी के लिए 7 दिन तक की छुट्टियां मांगें तो उन्हें  घूस की दोगुनी रकम देनी पड़ती है।

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