
एफएनएन, रायपुर : पॉक्सो एक्ट के आरोप में पिछले तीन महीनों से जेल में बंद सुनील महानंद की जेल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. जेल प्रशासन इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि परिजन और समाज के लोग इसे हत्या करार दे रहे हैं. घटना के बाद परिजन जेल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं और न्यायिक जांच, SIT जांच की मांग कर रहे हैं.
मौत के समय और सूचना पर उठे सवाल: परिजनों का आरोप है कि सुनील महानंद की मौत शाम करीब 6 बजे हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी परिवार को रात 12 बजे दी गई. इतना ही नहीं, परिजनों की मौजूदगी के बिना ही शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, जिससे जेल प्रशासन की भूमिका पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है.
आत्महत्या नहीं, प्रताड़ना के बाद हत्या का आरोप: परिजनों और समाज के लोगों का कहना है कि सुनील ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि जेल के भीतर उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जा रही थी. लंबे समय से दबाव और परेशानियों के चलते वह मानसिक रूप से टूट चुका था, इसी कारण इस मौत को सुनियोजित हत्या बताया जा रहा है.
झूठे मामले में फंसाने का दावा: परिजनों का दावा है कि सुनील महानंद को जबरदस्ती पॉक्सो एक्ट के मामले में फंसाया गया. तीन अलग-अलग स्थानों पर कराए गए मेडिकल परीक्षणों में उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी. इसके बावजूद उसे लगातार परेशान किया गया. परिजनों का यह भी कहना है कि सुनील के खिलाफ पहले कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं रहा.
जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी: घटना की जानकारी मिलते ही सोमवार सुबह से ही जेल परिसर के सामने धरना शुरू हो गया. परिजन और समाज के लोग जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर परिजन अड़े हैं. जेल परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन के चलते माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.
न्यायिक जांच और एसआईटी की मांग: परिजनों ने इस मामले में न्यायिक जांच कराने और एसआईटी गठित कर पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, सच्चाई सामने नहीं आएगी और दोषियों को सजा नहीं मिल पाएगी.
सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग: परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जेलर को तत्काल सस्पेंड करने की मांग की है. इसके अलावा मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी और परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई गई है.
जेल प्रशासन पर गहराता संकट: जेल के भीतर कैदी की संदिग्ध मौत, सूचना देने में देरी और परिजनों की गैरमौजूदगी में पोस्टमार्टम जैसे मामलों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है. फिलहाल परिजन न्याय मिलने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं.





