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पाकिस्तान की संसद ने एक संवैधानिक संशोधन पारित किया, आसिम मुनीर की बढ़ेगी ताकत, बनेंगे देश के पहले CDF

एफएनएन, इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद ने एक संवैधानिक संशोधन पारित किया. जो सेना प्रमुख को आजीवन कानूनी छूट प्रदान करता है, साथ ही उनकी शक्तियों का विस्तार करता है और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों पर अंकुश लगाता है. विपक्ष ने कहा कि इस कदम ने देश में लोकतंत्र के जहाज को डुबो दिया है.

234 सांसदों ने संविधान संशोधन के पक्ष में किया मतदान
डॉन के अनुसार नेशनल असेंबली ने 27वें संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई से अधिक बहुमत से मंजूरी दे दी. इसमें 234 सांसदों ने इसके पक्ष में और केवल चार ने विरोध में मतदान किया. 59 खंडों वाले इस विधेयक को सीनेट ने इस हफ्ते की शुरुआत में मंजूरी दे दी थी, जिसके पक्ष में 64 वोट पड़े थे और विपक्ष का कोई वोट नहीं पड़ा क्योंकि विपक्षी दलों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया था.

थल सेनाध्यक्ष को रक्षा बलों के प्रमुख सीडीएफ का पद प्राप्त होगा
डॉन ने बताया कि विधेयक को अब मामूली संशोधनों पर पुनर्विचार के लिए सीनेट में वापस भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. संशोधन के तहत पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष को रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएफ) का पद भी प्राप्त होगा.

इससे वह पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायु सेना का औपचारिक प्रमुख बन जाएगा. यह विधेयक फील्ड मार्शल, वायु सेना के मार्शल और फ्लीट के एडमिरल जैसी मानद सैन्य उपाधियों को आजीवन पदनाम के रूप में भी संरक्षित करता है. इस परिवर्तन से जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के रक्षा ढांचे के केन्द्र में आ गए हैं, जिससे सेना प्रमुख को अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में व्यापक संवैधानिक मान्यता और प्रभाव प्राप्त हुआ है.

संघीय संवैधानिक न्यायालय (FCC) की स्थापना
डॉन के अनुसार यह संशोधन संवैधानिक मामलों को निपटाने के लिए एक नए संघीय संवैधानिक न्यायालय (FCC) की स्थापना करता है. इससे पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की भूमिका प्रभावी रूप से कम हो जाएगी, जिसने हाल के वर्षों में सरकारी नीतियों को अवरुद्ध किया है. वर्तमान प्रधानमंत्रियों को पद से हटाया है. नए न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी और यह मौजूदा सुप्रीम कोर्ट से अलग कार्य करेगा.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) का पद वर्तमान पदधारक के पास ही रहेगा, लेकिन भविष्य की नियुक्तियों में सीजेपी को सुप्रीम कोर्ट और नए एफसीसी, दोनों के मुख्य न्यायाधीशों में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में परिभाषित किया जाएगा.

पीटीआई ने किया संविधान संशोधन का विरोध
नए न्यायालय को उच्च राजद्रोह के कृत्यों की पुष्टि करने से भी रोक दिया जाएगा. आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान सेना सहित राज्य संस्थाओं को जवाबदेही से बचाता है. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा स्थापित पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने मतदान से पहले सदन से बहिर्गमन किया और विरोध में विधेयक की प्रतियां फाड़ दी.

लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के जहाज को डुबो दिया: पीटीआई
पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान ने कहा कि सरकार ने लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के जहाज को डुबो दिया है. उन्होंने आगे कहा, ‘उन्होंने एक और संशोधन पेश किया है जो हम पहली बार देख रहे हैं. अनुच्छेद 260 में हर चीज की परिभाषाएँ हैं लेकिन उन्होंने बिना किसी उचित बहस के एक नया उपखंड जोड़ दिया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विधेयक के पारित होने का बचाव करते हुए कहा कि संसद ने एकजुटता और राष्ट्रीय एकता दिखाई है.

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