विधायक जी, जमीन की मुआवजा राशि से दिलवाएं विस्थापित रबड़ फैक्ट्री कर्मियों के लंबित भुगतान

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श्रमिक नेताओं और आश्रित विधवाओं ने मीरगंज विधायक डीसी वर्मा को ज्ञापन देकर लगाई गुहार

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फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। एससी कर्मचारी यूनियन की कोर कमेटी से संबद्ध रहे रबर फैक्ट्री के बहुत से श्रमिक नेता और रबड़ फैक्ट्री कर्मियों की कई विधवाएं सचिव अशोक कुमार मिश्रा के नेतृत्व में मीरगंज विधायक डॉक्टर डीसी वर्मा के नए निवास मिनी बाईपास पर उनसे मिले और 25 वर्ष से भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे विस्थापित रबड़ फैक्ट्री मजदूरों के वैधानिक रूप से देय भुगतानों को यथाशीघ्र दिलवाने की गुहार लगाई।

इस मौके पर विधायक को देय ज्ञापन में बताया गया कि उच्च न्यायालय मुंबई और उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेशों में भी भुगतान को न्यायोचित बताते हुए सरकार को जल्द दिलवाने के निर्देश दिए जा चुके हैं लेकिन वर्षों बाद भी भुगतान लंबित हैं। इस मामले में विधायक से विधानसभा में सवाल उठाने और पैरवी कर सरकार से भुगतान जल्द करवाने का ज्ञापन में आग्रह किया गया है।

बताया गया कि मुंबई हाईकोर्ट में भी पिछले कई साल से सिर्फ तारीख पर तारीखें ही पड़ रही हैं। सैकड़ों भुक्तभोगी मजदूरों के हक में अदालत का फैसला पता नहीं किस दिन आएगा। अगली पेशी 8 अक्टूबर 2025 को होनी है। इधर, मजदूरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। घनघोर आर्थिक तंगी में फंसे दो-चार विस्थापित मजदूर बीमारी या अन्य कारणों से हर महीने असमय मौत के मुंह में चले ही जाते हैं।

ज्ञापन में विधायक से नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई रबड़ फैक्ट्री की 6.37 हेक्टेयर जमीन की बरेली प्रशासन के कोषागार में वर्ष 2007 से पड़ी करोड़ों की रकम में से रबर फैक्ट्री के विस्थापित मजदूरों या उनके आश्रितों को अंतिम राहत के रूप में भुगतान करवाने का विशेष आग्रह भी किया गया है।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि पिछले 26 साल में अचानक अघोषित बंदी की शिकार हुई रबड़ फैक्ट्री के 450 से भी अधिक विस्थापित कर्मचारी असमय में मृत्यु के शिकार हो चुके हैं। साथ ही एक दर्जन से ज्यादा श्रमिकों को आत्महत्या करनेपर मजबूर होना पड़ा है।

विधायक डॉ. वर्मा ने आश्वस्त किया कि बरेली कोषागार में पड़ी नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई रबड़ फैक्ट्री भूमि की मुआवजा राशि में से श्रमिकों का भुगतान करवाने की भरपूर पैरवी और हरसंभव कोशिश जरूर करेंगे। ज्ञापन देते वक्त दर्जनों श्रमिक नेताओं के साथ कई मजदूरों की आश्रित विधवाएं भी मौजूद रहीं।

 

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