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एफएनएन, देहरादून: उत्तराखंड के थराली में आई आपदा के बाद से पूरे क्षेत्र का जनजीवन अस्त व्यस्त है. तमाम टीमें सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई हैं. लापता लोगों की तलाश जारी है. इस आपदा से प्रभावित हुए लोगों को खाद्य आपूर्ति विभाग कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी जरूरत के अनुसार हर सामान मुहैया करा रहा है. आलम यह है कि सड़क मार्ग टूट जाने के बावजूद भी खाद्य सामग्री की सप्लाई हो रही है.
उत्तराखंड के धराली में आई आपदा से पूरा क्षेत्र मलबे से पट गया है. लोगों का व्यापार चौपट हो गया है. इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. पूरा धराली बाजार तबाह हो गया है. लेकिन ये आपदा धारली के लोगों के हौसले नहीं डगमगा पाई. जबकि अलग-अलग विभाग के कर्मचारी भी आपदा प्रभावितों के लिए सुविधाएं जुटाने में लगे हुए हैं. ऐसी ही कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें खाद्य सामग्री जर्जर रास्तों और कठिन हालातों के गुजरते हुए धराली पहुंचाई जा रही है.
तस्वीरों के मुताबिक कठिन परिस्थितियों में लंबी दूरी तय करने वाले यह कर्मचारी या मजदूर अपने कंधे पर रखकर सिलेंडर की सप्लाई कर रहे हैं. ताकि आपदा के कार्यों में लगे कर्मचारियों और अपना सब कुछ इस आपदा में खो चुके लोगों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो.
गौर है कि उत्तरकाशी से हर्षिल तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है. सड़क और पुल निर्माण के लिए दिन-रात विभाग काम कर रहा है. ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है कि वहां रह रहे लोगों के खाने-पीने में किसी तरह की कोई कमी ना हो. इसके लिए नमक, तेल, चीनी, चाय, मसाले, सिलेंडर इन सभी को कंधों पर रखकर बेहद कठिन परिस्थितियों में वहां तक पहुंचाया जा रहा है. लगभग 12 हजार से अधिक की आबादी वाले इस क्षेत्र में किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए यह प्रयास किया जा रहा है.
आपदा नियंत्रण सचिव विनोद कुमार सुमन का कहना है कि इस आपदा से बेहद नुकसान पहुंचा है. लेकिन जो लोग वहां काम कर रहे और जो लोग वहां रह रहे हैं, उनको किसी भी तरह की दिक्कत ना आए, इसलिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं. खाद्य आपूर्ति विभाग को बड़े स्तर पर यह काम सौंपा गया है कि आने वाले दिनों या महीनों का राशन पहले से ही आपदा वाली साइट पर स्टोर कर लिया जाए.
जिला खाद्य आपूर्ति से मिली जानकारी के अनुसार, आपदाग्रस्थ क्षेत्र में हर परिवार को 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 1 किलो दाल, आधा लीटर तेल और अलग-अलग मसाले के साथ-साथ चीनी, चायपत्ती, 5 किलो आलू, नहाने और कपड़े धोने के साबुन भिजवाए गए हैं. इसके साथ ही, झाला से 25 सिलेंडर पहले से ही कम्युनिटी किचन को दिए गए हैं. खाने-पीने का भंडार पूरी तरह से भरा हुआ है. आने वाले दिनों में भी खाने पीने के किसी भी सामग्री की कमी नहीं होगी. इसके साथ ही हेलीकॉप्टर के माध्यम से पेट्रोल डीजल के ड्रम भी हर्षिल भिजवाए जा रहे हैं.
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