Thursday, February 12, 2026
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सीएमओ बने उदय नाथ, हटाए गए हरिदत्त नेमी काम न आई विधासभा अध्यक्ष की सिफारिस

एफएनएन, कानपुर: कानपुर में चल रहे डीएम और सीएमओ के बीच महीनों से चल रहे विवाद में आखिरकार गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी को शासन स्तर हटा दिया गया। उनके स्थान पर श्रावस्ती के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी उदय नाथ को कानपुर का नया सीएमओ बनाकर भेजा गया है। डॉ हरिदत्त नेमी को कानपुर से ना हटाने की पैरवी उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से लेकर भाजपा के कई विधायकों ने की थी।

सचिव रितु महेश्वरी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। जिला स्वास्थ्य समिति एवं संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के बिना नियुक्ति पत्र जारी किए गए, जो नियमों का उल्लंघन है। आदेश में कहा गया है कि उक्त कार्यवाही अधीनस्थ चिकित्सा संवर्ग (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4(1) के अंतर्गत की गई है। अब डॉ. नेमी का मुख्यालय महोबा मंडलीय संयुक्त चिकित्सालय नियत किया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने की थी ब्रजेश पाठक से सीएमओ की सिफारिस

डॉ. हरिदत्त नेमी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष और कानपुर के वरिष्ठ नेता सतीश महाना ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर बताया था कि डॉ. नेमी का जनता के प्रति व्यवहार बेहद सहज और कार्यशैली सराहनीय है। उन्होंने आग्रह किया कि जनता की भावना को देखते हुए उन्हें कानपुर में ही बनाए रखा जाए।

बता दे कि सिर्फ महाना ही नहीं, एमएलसी अरुण पाठक और गोविंदनगर से भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी सीएमओ के पक्ष में डिप्टी सीएम को पत्र भेजा था। इन नेताओं ने लिखा कि डॉ. नेमी सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों से उनका व्यवहार सदैव सम्मानजनक रहा है।

बिठूर से विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने की थी सीएमओ की खिलाफत

हालांकि बिठूर से विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में साफ-साफ कहा कि डॉ. हरिदत्त नेमी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्होंने डीएम के खिलाफ ऑडियो वायरल कर माहौल को बिगाड़ा है और उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। सांगा ने यह भी आरोप लगाया कि सीएमओ डॉक्टरों और स्टाफ के साथ अभद्रता करते हैं, आदेशों की अवहेलना करते हैं और तबादलों में मनमानी करते हैं।

जानें मामला

बता दें कि जिलाधिकारी और सीएमओ के बीच पूरा विवाद एक ऑडियो वायरल होने के बाद हुआ था। वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर डीएम पर टिप्पणी करता है। वो कहता है कि 75 जिलों में ऐसा कोई डीएम नहीं देखा जो इस तरह बात करता हो। दूसरे ऑडियो में वही व्यक्ति कुछ लोगों से पैसों की व्यवस्था को लेकर बात करता सुनाई देता है। वहीं CMO ने इन ऑडियो में अपनी आवाज होने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है और इस तरह की तकनीक से किसी को भी फंसाया जा सकता है।

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